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जमुई एसपी को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने जारी किया नोटिस, जानिए क्यों


जमुई (न्यूज़ डेस्क) :-

 जमुई थाना के कांड संख्या 36/2017 जिसमें स्थानीय पुलिस ने दिलीप सिंह नामक व्यक्ति के एक ट्रैक्टर से एक व्यक्ति को मार देने के अपराध में जब्त किया था।
घटना के साढ़े 3 साल बाद भी उक्त ट्रैक्टर का एम. वी. आई. के द्वारा जांच नहीं किए जाने के कारण अंतर्गत न्यायालय ने वाहन को मुक्त करने का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश के बावजूद कई दिनों तक वाहन को नहीं छोड़ा गया। फिर न्यायालय को संबंधित अनुसंधानकर्ता के विरुद्ध कारण परीक्षा जारी करनी पड़ी। उससे घबराए अनुसंधानकर्ता ने गाड़ी को मुक्त कर दिया।


 जब पुलिस अधीक्षक जमुई को इस तथ्य की जानकारी हुई कि बिना   एम. वी. आई. रिपोर्ट के ही न्यायालय ने वाहन को मुक्त कर दिया है तो उन्होंने आनन-फानन में लिखित रूप से यह आदेश पारित कर दिया कि अनुसंधानकर्ता के द्वारा रिपोर्ट न्यायालय में देने के कारण वाहन को मुक्त किया गया।  इसी कारण से उन्होंने यह कथित करते हुए कि वाहन पर परिवहन विभाग का लगभग 60,000 बकाया है, तो क्यों नहीं अनुसंधानकर्ता से उनके वेतन से 60000 वसूली की जाए।  एसपी साहब के इस आदेश से घबराकर जमुई थाना के पुलिस पदाधिकारी ने 3 दर्जन पुलिस के साथ माननीय न्यायालय से मुक्त वाहन को पुनः न्यायालय के बिना पूर्व अनुमति के जब्त कर लिया।


 मामले में वाहन को मुक्त करते हुए न्यायालय के समक्ष कानून की बारीकियों को प्रस्तुत करने वाले तेज तरार युवा अधिवक्ता अमित कुमार ने न्यायालय को पुलिस की इस  तानाशाही रवैये को प्रस्तुत करते हुए कहा कि भले ही न्यायालय द्वितीय श्रेणी का हो या सर्वोच्च न्यायालय का हो, अगर उसने किसी प्रकार के गलत- सही निर्णय को पारित भी कर दिया हो तो उससे चुप्त पक्षकार को उससे वरीय न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दाखिल करनी होती है, परंतु ना जाने किस गलतफहमी में चकनाचूर जमुई एसपी ने न्यायालय के आदेश के बावजूद पुनः वाहन को जब्त कर लिया है।


 इसे गंभीरता से लेते हुए सीजेएम ने अनुसंधानकर्ता के साथ-साथ जमुई जिला के पुलिस अधीक्षक को काम परीक्षा का नोटिस जारी किया है।
 न्यायालय के आदेश की अवमानना को लेकर सीजीएम जमुई ने 4 दिनों के अंदर एसपी जमुई से इसकी की मांग की है।
 वही पक्ष ने कहा है कि वे इस मामले को पटना उच्च न्यायालय में ले जाएंगे। उनके अधिवक्ता अमित कुमार ने कहा है कि भले ही किसी व्यक्ति पर एक एक बार नहीं वरन सौ दफा खून करने का करने का आरोप हो परंतु अगर न्यायालय ने उसे मुक्त करने का आदेश दे दिया है, तो कोई भी इसका उलंग्घन नहीं कर सकते।
फिलहाल अब न्यायिक स्तर पर सभी की नजर जमुई एसपी पर टिकी हुई है।