गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 18 अक्टूबर 2026, रविवार : बिहार के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में शुमार गिद्धौर स्थित देवी मंडा (दुर्गा मंदिर) में शनिवार की सप्तमी की रात्रि तांत्रिक विधि-विधान के साथ निशा पूजा एवं प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान संपन्न हुआ। ढोल की थाप और मां दुर्गा के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। चंदेलवंशी राजघराने द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
वैदिक व तांत्रिक मंत्रोच्चार के साथ हुई प्राण प्रतिष्ठा
नागी, नकटी और उलाई नदियों के संगम तट पर अवस्थित देवी मंडा में झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथधाम से आए विद्वान पंडा महेश्वर जी महाराज एवं योगेश्वर जी महाराज ने विधि-विधान के साथ पूजन कार्यक्रम संपन्न कराया। इस दौरान निर्धारित धार्मिक नियमों के अनुसार कलश स्थापना कर देवी का आह्वान किया गया और प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की गई।
प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर मां दुर्गा के अस्त्र-शस्त्रों की भी विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इससे पूर्व माता को लगभग ढाई किलोग्राम वजन वाले रत्नजड़ित मुकुट से सुशोभित किया गया। अनुष्ठान के दौरान मां शेरावाली के साथ देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती, भगवान शिव, भगवान कार्तिकेय एवं भगवान गणेश का भी आह्वान किया गया।
तांत्रिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है गिद्धौर का दुर्गा मंदिर
गिद्धौर का ऐतिहासिक देवी मंडा (दुर्गा मंदिर) अपनी विशिष्ट पूजा पद्धति और प्राचीन धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बिहार में गिद्धौर और दरभंगा दो ऐसे प्रमुख स्थान हैं, जहां तांत्रिक रीति से देवी की पूजा की परंपरा प्रचलित है। चंदेलवंशी राजघराने की इस धरोहर में प्रत्येक वर्ष शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान पारंपरिक विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
प्राण प्रतिष्ठा के साथ शुरू हुआ दंडवत
पूजन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय पंडितों, राजघराने के कुल पुरोहित, शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति के सदस्यों और स्थानीय बुद्धिजीवियों की उपस्थिति रही। प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं का दंडवत शुरू हो गया। मंदिर के पट विजयादशमी तक श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए खुले रहेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, महाष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर, महानवमी मंगलवार, 20 अक्टूबर तथा विजयादशमी बुधवार, 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इन अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

