गिद्धौर/जमुई। सनातन संस्कृति सेवा समिति, गिद्धौर के तत्वावधान में गायत्री मंदिर (पंचमंदिर) के निकट आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव धार्मिक आस्था, भक्ति और उल्लास के बीच संपन्न हो गया। जन्माष्टमी को लेकर बनाए गए भव्य पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न मनोहारी स्वरूपों की आकर्षक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। कई दिनों तक चले धार्मिक आयोजन के बाद बीते सोमवार की देर शाम विधि-विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर गायत्री मंदिर के समीप आकर्षक ढंग से भव्य पंडाल तैयार किया गया था। पंडाल की सजावट और उसमें स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न प्रतिमाओं ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। यहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से लेकर उनके विभिन्न मनोहारी रूपों को प्रतिमाओं के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया था। बाल रूप में माखन खाते कान्हा, माखन चुराते श्रीकृष्ण तथा राधा रानी के साथ विराजमान भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहीं।
प्रतिमाओं को इस तरह सजाया गया था कि पंडाल में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं का सजीव एहसास होता रहा। दर्शन के दौरान श्रद्धालु भावविभोर नजर आए और पूरे आयोजन स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा।
धार्मिक अनुष्ठान और हवन के साथ हुआ समापन
महोत्सव के समापन से पूर्व सनातन संस्कृति सेवा समिति के पुरोहित उत्तम कुमार झा उर्फ राजा बाबू के निर्देशन में शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। कलश विसर्जन पूजन के बाद विधिपूर्वक हवन कराया गया और श्रद्धालुओं की ओर से हवन कुंड में आहुतियां अर्पित की गईं। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाया गया।
घनश्याम स्थान रोड से निकली विसर्जन शोभायात्रा
सोमवार की देर शाम प्रतिमा विसर्जन को लेकर श्रद्धा और उत्साह के बीच विसर्जन जुलूस निकाला गया। जुलूस गिद्धौर के घनश्याम स्थान रोड से प्रारंभ होकर सार्वजनिक पुस्तकालय, लॉर्ड मिंटो टावर चौक, राजश्री गैस एजेंसी और पोस्ट ऑफिस के रास्ते त्रिपुर सुंदरी तालाब पहुंचा। इस दौरान श्रद्धालु धार्मिक भावनाओं के साथ जुलूस में शामिल हुए। त्रिपुर सुंदरी तालाब पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
खीर, हलवा और खिचड़ी भंडारे का हुआ आयोजन
समिति के सदस्य बिट्टू कुमार रावत ने बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान कई धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण को खीर का भोग लगाया गया, जबकि रविवार को हलवा का भोग अर्पित किया गया। रविवार को ही खिचड़ी भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर महाप्रसाद ग्रहण किया।
उन्होंने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। महिला, पुरुष और बच्चों ने पंडाल पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन किए और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
सनातन संस्कृति और परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास
जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर स्थानीय लोगों में भी विशेष उत्साह देखा गया। समिति के वरिष्ठ सदस्य रॉकी कुमार ने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाना भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी परंपराओं और संस्कारों से परिचित रह सकें।
उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों के साथ स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के सहयोग के प्रति आभार जताया।
आयोजन में समिति के सदस्यों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को सफल बनाने में सनातन संस्कृति सेवा समिति के सदस्यों ने पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ योगदान दिया। आयोजन की तैयारियों से लेकर धार्मिक कार्यक्रमों, भंडारे और प्रतिमा विसर्जन तक समिति के सदस्य लगातार सक्रिय रहे।
आयोजन को सफल बनाने में सुमन कुमार रावत, राकेश कुमार, ठाकुर अंकित, संतोष पंडित, धीरज कुमार, अंजेश कुमार, आकाश कुमार सोनू, राज कुमार, मिथिलेश कुमार, अमित कुमार, प्रिंस झा, पीयूष कुमार, विकास माथुरी, आकाश कुमार, आशीष गुप्ता, आदित्य कुमार, नीतीश कुमार गट्टू सहित समिति के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस प्रशासन का रहा सहयोग
प्रतिमा विसर्जन के दौरान गिद्धौर थाना पुलिस का भी सराहनीय सहयोग रहा। थानाध्यक्ष राशि मलिक के नेतृत्व में पुलिस बल विसर्जन जुलूस के दौरान तैनात रहा और जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में सहयोग किया। पुलिस की मौजूदगी के कारण विसर्जन जुलूस निर्धारित मार्ग से शांतिपूर्ण ढंग से त्रिपुर सुंदरी तालाब तक पहुंचा और प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न हुई।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के समापन के साथ ही गिद्धौर में कई दिनों से बना भक्तिमय माहौल शांत हुआ। आयोजन ने जहां श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन का अवसर दिया, वहीं धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति लोगों में आस्था और जुड़ाव को भी मजबूत किया।







