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सोमवार, 28 सितंबर 2026

दिनकर जयंती पर पगडंडी जमुई द्वारा साहित्यिक प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

  • ‘पगडंडी जमुई’ के तत्वावधान में हिन्दी पखवारा के तहत समग्र भारत न्यास का दसवां संस्करण आयोजित
  • साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले हुए सम्मानित

जमुई/बिहार। हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक चेतना को समर्पित साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रकल्प ‘पगडंडी जमुई’ के तत्वावधान में हिन्दी पखवारा के अंतर्गत राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर समग्र भारत न्यास का दसवां संस्करण आयोजित किया गया। शुक्रवार को आयोजित दिनकर जयंती सह सम्मान समारोह में साहित्य, पत्रकारिता, नाट्यकला, संगीत, समाजसेवा, महिला जागरूकता और क्षेत्रीय भाषा-संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत के गायन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। साक्षी पंडित ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर समारोह में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक वातावरण बनाया।

दस वर्षों से हिन्दी और साहित्य के लिए सक्रिय ‘पगडंडी जमुई’
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि ‘पगडंडी जमुई’ पिछले दस वर्षों से लगातार हिन्दी पखवारा और दिनकर जयंती के आयोजन के माध्यम से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देता आ रहा है। आयोजन का उद्देश्य हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ रचनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को मंच प्रदान करना है।

पगडंडी के अध्यक्ष डॉ. रवीश कुमार सिंह ने कहा कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के बीच संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। संस्था की ओर से साहित्य, कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रचनात्मक प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
'राष्ट्रकवि दिनकर की प्रासंगिकता’ पर हुआ विमर्श
कार्यक्रम में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ की प्रदेश समिति के सदस्य अशोक राय ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया। वहीं जेआरएस कॉलेज, जमालपुर के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार सिंह ने ‘राष्ट्रकवि दिनकर की प्रासंगिकता’ विषय पर विस्तार से विचार रखते हुए दिनकर के साहित्य, राष्ट्रबोध और सामाजिक चेतना पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि दिनकर की रचनाएं आज भी सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय भावना और मानवीय मूल्यों के संदर्भ में प्रासंगिक हैं। समारोह में हिन्दी के साथ-साथ अंगिका और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं एवं बोलियों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

साहित्य और नाट्य क्षेत्र में मिला पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी हिन्दी सेवा सम्मान
समारोह में पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी हिन्दी सेवा सम्मान के तहत साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए शिवनंदन सलिल को सम्मानित किया गया। वहीं नाट्य लेखन, निर्देशन और मंचन के क्षेत्र में योगदान के लिए भागलपुर के रंगकर्मी कपिलदेव रंग को सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान कपिलदेव रंग की टीम के कलाकारों ने ‘ओ री चिरैया’ एकल अभिनय की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। नवजात बच्ची को कूड़ेदान में फेंकने की घटना पर आधारित इस मंचन ने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों को गंभीर सामाजिक प्रश्नों पर सोचने के लिए विवश किया।
भजन और गायन के क्षेत्र में भी प्रतिभाओं का सम्मान
अर्जुनदास सरस्वती सम्मान के तहत भजन लेखन एवं गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए महंत यमुना राम को सम्मानित किया गया। वहीं भक्ति परक रचनाओं, कविता और गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए भागलपुर के प्रसिद्ध कवि, गीतकार एवं गायक कपिलदेव कृपाला को सम्मान प्रदान किया गया।

संगीत शिक्षक देवेन्द्र सिंह और कपिलदेव कृपाला ने अपने मधुर स्वर में भजनों एवं गजलों की प्रस्तुति दी। संगीत और साहित्य की इस प्रस्तुति ने समारोह में मौजूद साहित्य प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित किया।

पत्रकारिता, समाजसेवा और संस्कृति के क्षेत्र में भी सम्मान
समारोह में नेतृत्व प्रतिदर्श सम्मान-2026 के तहत विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। साहित्यिक पत्रकारिता एवं संपादन के लिए चंदन केसरी, पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए मनोज तिवारी, कुशल संवाद संप्रेषण के लिए अभिषेक कुमार सिन्हा, अंग्रेजी साहित्य में मौलिक लेखन के लिए कुमुद कुमार, समाजसेवा के लिए पंकज कुमार सिंह तथा महिला जागरूकता एवं विकास के क्षेत्र में कार्य के लिए बेबी कुमारी को सम्मान प्रदान किया गया।
इसी क्रम में संस्कृति जागरण के क्षेत्र में योगदान के लिए राजीव पांडेय तथा संगीत शिक्षण, सांस्कृतिक विरासत और संरक्षण के लिए देवेन्द्र सिंह को सम्मानित किया गया।

अंगिका साहित्य की सेवा के लिए महेन्द्र प्रसाद ‘निशाकर’ सम्मानित
क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण को लेकर भी समारोह में विशेष चर्चा हुई। अंगिका साहित्य की सेवा के लिए महेन्द्र प्रसाद ‘निशाकर’ को साहित्य सेवा सम्मान प्रदान किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान उसकी भाषा, लोक परंपरा, साहित्य और कलाओं से गहराई से जुड़ी होती है। इसलिए स्थानीय भाषाओं और बोलियों को प्रोत्साहित करना केवल साहित्यिक दायित्व ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी है।

कवि सम्मेलन में रचनाओं ने बांधा समां
समारोह के दौरान कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसका संचालन जमालपुर के कवि शिवनंदन सलिल ने किया। इस अवसर पर भावानंद, डॉ. नूतन कुमारी, रणजीत, अजय कुमार सिंह, विकास गुलटी, कपिलदेव कृपाला, महेन्द्र निशाकर और शंभू केसरी सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

कवियों की प्रस्तुतियों ने समारोह को साहित्यिक रंग प्रदान किया और श्रोताओं ने रचनाओं का आनंद लिया।

मंच संचालन से लेकर आयोजन व्यवस्था तक रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. शैलेन्द्र कुमार एवं पगडंडी के उपाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने किया। वहीं निरंजनानंद योग केंद्र के संचालक योग गुरु स्वामी आत्मस्वरूपानंद ने भी साहित्यिक कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए।
आयोजन को सफल बनाने में पगडंडी के अध्यक्ष डॉ. रवीश कुमार सिंह के साथ कार्यक्रम प्रभारी रोहित कुमार, उपाध्यक्ष ब्रजेश भारती, सचिराज पद्माकर और शैलेश कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समारोह की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में आयोजन से जुड़े अन्य सदस्यों और स्वयंसेवकों की भी सक्रिय भागीदारी रही।

साहित्य और संस्कृति के संवाद को आगे बढ़ाने का संकल्प
दिनकर जयंती के अवसर पर आयोजित इस समारोह में साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा, संगीत, नाट्यकला और संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने के साथ हिन्दी एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को लेकर संवाद हुआ।

आयोजकों ने कहा कि ‘पगडंडी जमुई’ के माध्यम से जमुई में साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा। समग्र भारत न्यास का दसवां संस्करण इसी साहित्यिक यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। समारोह का समापन साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के प्रति निरंतर सक्रिय रहने के संकल्प के साथ हुआ।

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