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सोमवार, 28 सितंबर 2026

बेटी के जन्म पर गंगरा गांव में अनोखा जश्न! काफिले और डीजे के साथ नवजात को लेने पहुंचे पिता-दादा

  • नवजात ‘आरोही’ के स्वागत में बारात की तरह सजा काफिला
  • बोले पिता-दादा—बेटी किसी बेटे से कम नहीं

गंगरा/गिद्धौर। जहां आज भी कई जगह बेटियों के जन्म पर मायूसी का माहौल देखने को मिलता है, वहीं जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड के गंगरा गांव ने बेटी के जन्म पर ऐसा उत्सव मनाकर समाज के सामने सकारात्मक संदेश पेश किया है। गांव निवासी अमित कुमार सिंह की नवजात बेटी के स्वागत के लिए पिता और दादा 10 गाड़ियों के काफिले और डीजे के साथ जमुई सदर अस्पताल पहुंचे। नवजात को अस्पताल से घर लाने का यह अंदाज देखते ही लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा था।
15 सितंबर को हुआ बेटी का जन्म
गंगरा गांव निवासी अमित कुमार सिंह की पत्नी ने 15 सितंबर को जमुई सदर अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया। परिवार ने नवजात के स्वागत को खास और यादगार बनाने का निर्णय लिया। पिता अमित कुमार सिंह और दादा दिलीप सिंह ने तय किया कि बेटी को अस्पताल से घर उसी उत्साह के साथ लाया जाएगा, जिस तरह परिवारों में बेटे के जन्म पर उत्सव मनाया जाता है।
10 गाड़ियों के काफिले के साथ अस्पताल पहुंचे
बेटी के स्वागत के लिए 23 सितंबर की देर शाम पिता अमित कुमार सिंह और दादा दिलीप सिंह परिजनों के साथ करीब 10 गाड़ियों के काफिले में डीजे लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचे। गाड़ियों को गुब्बारों से सजाया गया था। डीजे की धुन के बीच निकला यह काफिला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

गिद्धौर बाजार से होकर गुजरते हुए जब यह काफिला जमुई सदर अस्पताल पहुंचा तो आसपास मौजूद लोग भी उत्सुकता से इसे देखने लगे। अस्पताल पहुंचने के बाद परिजनों ने खुशी के माहौल में नवजात बच्ची को गोद में लिया और पूरे उत्साह के साथ उसे घर लेकर रवाना हुए।
नवजात का नाम रखा ‘आरोही’
परिजनों ने नवजात बच्ची का नाम ‘आरोही’ रखा है। पिता अमित कुमार सिंह और दादा दिलीप सिंह ने बेटी के जन्म पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके घर लक्ष्मी का जन्म हुआ है। उन्होंने कहा कि बेटी किसी लड़के से कम नहीं है और परिवार के लिए यह बेहद खुशी का अवसर है।
बेटी के सम्मान और समानता का दिया संदेश
गंगरा गांव में बेटी के जन्म पर मनाया गया यह जश्न महज पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच का संदेश भी गया। जिस तरह परिवार ने बेटी के जन्म को उत्सव के रूप में मनाया, उससे यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि बेटियां परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार की खुशियों और सम्मान का हिस्सा हैं।
परिजनों का कहना है कि आरोही का यह स्वागत सिर्फ एक नवजात बेटी का स्वागत नहीं, बल्कि नई सोच का भी स्वागत है। उनका मानना है कि समाज में बेटियों के जन्म को लेकर सोच बदलने की जरूरत है और ऐसे अवसरों पर खुशी मनाकर परिवार दूसरे लोगों को भी सकारात्मक संदेश दे सकते हैं।
गंगरा गांव के इस अनोखे स्वागत की चर्चा क्षेत्र में होती रही और लोगों ने इसे बेटियों के सम्मान तथा समानता की दिशा में एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायक पहल बताया।

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