- बाबा कोकिलचंद धाम निर्माण को धार्मिक पर्यटन और गंगरा को आदर्श ग्राम बनाने की मांग
- दिव्यांग शिक्षक ने शुरू की दूसरी दंडवत साधना
- 23 और 24 अगस्त को दो दिवसीय दंडवत साधना
- अंतिम पड़ाव होगा बाबा कोकिलचंद धाम
गंगरा/गिद्धौर (Gangra/Gidhaur), 23 अगस्त 2026, रविवार। जमुई जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल बाबा कोकिलचंद धाम, गंगरा को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने तथा सदियों से स्वतः शराब मुक्त रहकर पूरे बिहार में एक मिसाल पेश करने वाले गंगरा गांव को आदर्श ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर एक दिव्यांग शिक्षक का संघर्ष लगातार जारी है।
इसी संकल्प और मांग को लेकर श्रवण दिव्यांग शिक्षक, बाबा कोकिलचंद विचार मंच के संयोजक तथा मंदिर सचिव चुन-चुन कुमार ने लगातार दूसरे वर्ष दो दिवसीय दंडवत साधना शुरू की है। यह साधना 23 अगस्त 2026 को बाबा मारण जामु काबर, झाझा से प्रारंभ हुई, जो 24 अगस्त को बाबा कोकिलचंद धाम मंदिर, गंगरा (गिद्धौर) पहुंचकर संपन्न होगी।
प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सौंपा जा चुका है ज्ञापन
बाबा कोकिलचंद धाम के विकास और गंगरा को आदर्श ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर जिला प्रशासन जमुई, स्थानीय विधायक, जमुई सांसद तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अलग-अलग अवसरों पर मिलकर दो बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
वर्ष 2023 में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के अपर सचिव से भी चुन-चुन कुमार की वार्ता हुई थी। उनके सुझाव के बाद बाबा कोकिलचंद धाम, गंगरा का बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना से विधिवत निबंधन कराया गया। इस धार्मिक न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई हैं।
हालांकि, मंच के अनुसार सरकार की ओर से अब तक इन मांगों पर कोई लिखित आश्वासन प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में अपनी मांगों और संकल्प को लेकर यह धार्मिक साधना की जा रही है।
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी लिया दंडवत साधना का संकल्प
बाबा कोकिलचंद धाम को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने और गंगरा गांव को उसके सामाजिक आदर्शों के अनुरूप आदर्श ग्राम घोषित कराने की कामना से चुन-चुन कुमार ने पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी द्वितीय वर्षीय दो दिवसीय दंडवत साधना का संकल्प लिया है।
यह साधना श्रद्धा, आस्था और जनहित से जुड़े संकल्प का प्रतीक मानी जा रही है। 24 अगस्त को बाबा कोकिलचंद धाम पहुंचने के साथ ही यह दो दिवसीय धार्मिक साधना पूर्ण होगी।
सावन के अंतिम सोमवार को होगा सामूहिक रुद्राभिषेक
दंडवत साधना की पूर्णाहुति के बाद 24 अगस्त 2026 को सावन के अंतिम सोमवार की पावन संध्या पर बाबा कोकिलचंद धाम परिसर में तृतीय ग्राम सामूहिक रुद्राभिषेक का भव्य आयोजन किया जाएगा।
इस धार्मिक अनुष्ठान में गंगरा गांव के समस्त ग्रामीण परिवारों के साथ स्थानीय श्रद्धालु भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के यज्ञाचार्य परमानंद पांडेय होंगे, जबकि मुख्य यजमान के रूप में चुन-चुन कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होंगे।
आज भी प्रासंगिक है बाबा कोकिलचंद का त्रिसूत्र
बाबा कोकिलचंद द्वारा बताए गए तीन प्रमुख सामाजिक संदेश आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक माने जाते हैं—
1. शराब से दूर रहना
2. अन्न की रक्षा करना
3. नारी का सम्मान करना
इन्हीं मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बाबा कोकिलचंद विचार मंच पिछले दो दशकों से लगातार सामाजिक, धार्मिक और जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता आ रहा है।
दो दशकों से सेवा और जनजागरूकता का अभियान जारी
बाबा कोकिलचंद विचार मंच की ओर से धाम के विकास और बाबा के संदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक दीपावली, वृक्षारोपण, नेमान उत्सव, सम्मान समारोह, नशा मुक्ति जागरूकता अभियान तथा मंदिर निर्माण सहित कई कार्यक्रम निरंतर चलाए जा रहे हैं।
मंच के सदस्यों की इस निःस्वार्थ सामाजिक और धार्मिक सेवा को विभिन्न स्तरों पर सम्मान भी मिल चुका है। जिला प्रशासन जमुई, बिहार के मुख्यमंत्री, आईपीएस विकास वैभव सहित कई सामाजिक संगठनों द्वारा मंच से जुड़े सदस्यों को सम्मानित किया जा चुका है।
गंगरा को आदर्श ग्राम बनाने की मांग को मिल रही नई पहचान
सदियों से शराब मुक्त रहने की परंपरा, सामाजिक अनुशासन और बाबा कोकिलचंद के त्रिसूत्रों का पालन करने वाले गंगरा गांव को आदर्श ग्राम घोषित करने की मांग अब इस दंडवत साधना के माध्यम से एक बार फिर प्रमुखता से उठाई जा रही है।
मंच और ग्रामीणों को उम्मीद है कि बाबा कोकिलचंद धाम को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने तथा गंगरा को उसकी विशिष्ट सामाजिक पहचान के अनुरूप आदर्श ग्राम का दर्जा देने की दिशा में सरकार और प्रशासन सकारात्मक पहल करेगा।







