संध्या आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब, महंत गणेश राय और उनकी टीम ने बांधा समां
गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 22 अगस्त 2026, शनिवार : सावन माह में गिद्धौर स्थित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में शनिवार की संध्या आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। नागी, नकटी और उलाई नदी के संगम तट पर स्थित मंदिर में संध्या आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मां दुर्गा के जयकारों और भक्ति भजनों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
चंदेल राजवंश की ऐतिहासिक धरोहर है दुर्गा मंदिर
गिद्धौर राज रियासत की पहचान चंदेल राजवंश की ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ी रही है। उलाई नदी के तट पर चंदेल राजवंशियों द्वारा स्थापित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर आज भी क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नागी, नकटी और उलाई नदी के संगम तट पर स्थित इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व विशेष है।
गणेश वंदना से हुई भजन संध्या की शुरुआत
धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत ‘जय गणेश, जय महादेवा’ गणेश वंदना से हुई। इसके बाद महंत गणेश राय और उनकी टीम ने एक से बढ़कर एक भक्ति भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
सावन माह की धार्मिक भावना के अनुरूप प्रस्तुत ‘बोलबम के नारा बा... इहे एक सहारा बा...’, 'तेरे दर पर आऊंगा हर साल बनकर कांवरिया...', 'दीवाना तेरा आया, ओ मां तेरे दर पर...' भजन ने वातावरण को शिवमय कर दिया। भजन की धुन पर श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे नजर आए और पूरा मंदिर परिसर आस्था के रंग में रंग गया।
शास्त्रोक्त विधि से हुई पूजा-अर्चना
विद्वान पंडित वरुण पाण्डेय एवं उत्तम कुमार झा उर्फ राजा बाबू ने शास्त्रोक्त विधि से पूजा-अर्चना संपन्न कराई। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हवन किया गया और इसके बाद विधिवत मां दुर्गा की संध्या आरती हुई।
आरती में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मां की आराधना की। इसके पश्चात भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
भक्तिभाव से कार्यक्रम संपन्न
मां महादुर्गा आरती कमेटी के सदस्यों ने श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था संभाली। संध्या आरती और भजन-कीर्तन के इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही।
धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर गिद्धौर की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा को जीवंत कर दिया। श्रद्धालु देर तक भजनों और मां दुर्गा की आराधना में लीन नजर आए।







