पटना/बिहार। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत बताते हुए इसे छात्र-युवा आंदोलन की सफलता करार दिया है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि लंबे समय से केंद्र सरकार का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत रहा, जिसके कारण छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
धनंजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से केंद्र सरकार तानाशाही तरीके से कार्य कर रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों को ऐसा प्रतीत होने लगा था मानो लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह उनके नियंत्रण में है। उनके अनुसार, सरकार के इस रवैये से देश के बड़े वर्ग में निराशा का माहौल बना और अंततः छात्र-युवाओं ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।
उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कमियों को दूर करने की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने देशभर में सभी विद्यार्थियों के लिए समान, गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा के अलावा अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को अपने कार्य करने के तरीके में बदलाव लाना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्य करना चाहिए, ताकि नागरिकों और छात्रों को अपनी मांगों के लिए बार-बार आंदोलन करने की आवश्यकता न पड़े। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, छात्रों के हितों की रक्षा तथा लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए सकारात्मक पहल करने की मांग की है।







