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शनिवार, 13 जून 2026

बाबा कोकिलचंद मंदिर का पुस्तकालय बना सनातन ज्ञान का केंद्र, चारों वेद, नौ उपनिषद और संपूर्ण महाभारत उपलब्ध

गंगरा/गिद्धौर (Gangra/Gidhaur), 13 जून 2026, शनिवार : गिद्धौर प्रखंड के गंगरा गांव स्थित प्रसिद्ध बाबा कोकिलचंद धाम मंदिर का पुस्तकालय धीरे-धीरे सनातन संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक साहित्य का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। यहां अब हिंदू धर्म के मूल ग्रंथों में शामिल चारों वेद, नौ उपनिषद तथा संपूर्ण महाभारत उपलब्ध हैं, जिससे श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय संस्कृति और दर्शन के अध्ययन का बेहतर अवसर मिल रहा है।

जानकारी के अनुसार स्वर्गीय राजेश्वरी प्रसाद सिंह (अधिवक्ता) की पुण्य स्मृति में भारतीय शिक्षण मंडल, दिल्ली प्रांत के सह मंत्री एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. आशुतोष तिवारी ने छह खंडों में प्रकाशित संपूर्ण महाभारत मंदिर पुस्तकालय को समर्पित किया। इस महत्वपूर्ण योगदान से पुस्तकालय का ज्ञान-संग्रह और अधिक समृद्ध हो गया है।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी मंदिर पुस्तकालय को भारतीय संस्कृति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथ प्राप्त हो चुके हैं। गत वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. खेमचंद अरोड़ा ने चारों वेदों की प्रतियां पुस्तकालय को भेंट की थीं। उनके इस योगदान से पुस्तकालय में वैदिक साहित्य का महत्वपूर्ण संकलन उपलब्ध हो सका।
गंगरा निवासी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. उत्तम कुमार ने बताया कि वर्तमान में बाबा कोकिलचंद धाम मंदिर के पुस्तकालय में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद सहित नौ उपनिषद तथा संपूर्ण महाभारत उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक चिंतन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर परिसर में इस प्रकार के दुर्लभ और महत्वपूर्ण ग्रंथों की उपलब्धता से विद्यार्थियों, युवाओं और धर्म एवं दर्शन में रुचि रखने वाले लोगों को अध्ययन एवं शोध के लिए प्रेरणा मिलेगी। साथ ही यह पहल भारतीय संस्कृति और सनातन ज्ञान की विरासत को संरक्षित एवं प्रचारित करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास साबित होगी।

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