जमुई/बिहार। जिला प्रशासन और बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम “अद्भुत जमुई : पर्यटन एवं उद्योग विकास की नई दिशा” ने जिले के समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल का संकेत दिया। समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, निवेशकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने एक स्वर में यह संकल्प दोहराया कि जमुई अब पिछड़ेपन की छवि को पीछे छोड़ते हुए एक विकसित, आधुनिक और औद्योगिक जिले के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित करेगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने जमुई की ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और खनिज भंडार का उल्लेख करते हुए इसे अपार संभावनाओं की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि कभी ‘स्लीपिंग टाउन’ के रूप में पहचान रखने वाला जमुई अब पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। यहां हेरिटेज टूरिज्म, विलेज टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने विशेष रूप से कुकुरझप डैम पर रोपवे निर्माण, प्रमुख पर्यटन स्थलों पर साइनेज की व्यवस्था और स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित ‘टूरिस्ट गाइड’ के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार की होम-स्टे योजना के तहत उपलब्ध 20 लाख रुपये तक के ऋण का लाभ उठाकर स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने का आह्वान किया।
औद्योगिक विकास के पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बीआईए के पूर्व अध्यक्ष संजय गोयनका ने निवेशकों के लिए राज्य सरकार द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन नीतियों, सब्सिडी और बैंकिंग सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जमुई में करीब 7100 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है, जिनमें से कई परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ हो चुका है, जबकि शेष परियोजनाएं भी जल्द धरातल पर उतरेंगी। उन्होंने होटल उद्योग, सैटेलाइट सिटी और इको-टूरिज्म पार्क के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण में दी जा रही रियायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार निवेशकों के लिए ‘रेड कार्पेट’ बिछा चुकी है।
वहीं, बीआईए के पूर्व अध्यक्ष के.पी. केशरी ने जमुई की भौगोलिक स्थिति को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि देवघर और कोलकाता जैसे महत्वपूर्ण शहरों के निकट होने के कारण यह क्षेत्र एक रणनीतिक पर्यटन हब के रूप में विकसित हो सकता है।
जिला पदाधिकारी ने अपने संबोधन में जमुई को ‘ईश्वर निर्मित उपवन’ और ‘बिहार का कोहिनूर’ बताते हुए इसके समग्र विकास के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जिले में अब सुरक्षा का माहौल पूरी तरह बदल चुका है और जमुई नक्सलवाद के साये से मुक्त हो चुका है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में दुर्गम क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान और 31 मार्च 2026 को केंद्र सरकार द्वारा नक्सल मुक्त घोषित किए जाने की अधिसूचना इसका प्रमाण है।
उन्होंने भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि सिमुलतला में ‘वेलनेस सेंटर’ स्थापित किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, जिले की जीडीपी में सुधार और आर्थिक अंतर को कम करने के लिए प्रशासन युद्धस्तर पर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के समापन तक यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि प्राकृतिक सौंदर्य, खनिज संपदा, सस्ती श्रमशक्ति और बेहतर कनेक्टिविटी के दम पर जमुई अब निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। वॉटर स्पोर्ट्स, आध्यात्मिक पर्यटन और इको-टूरिज्म के समन्वित विकास के माध्यम से ‘अद्भुत जमुई’ अभियान जिले को बिहार के सबसे विकसित जिलों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।






