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बुधवार, 29 अप्रैल 2026

जमुई में भ्रष्टाचार पर कड़ा एक्शन, सिमुलतला आवासीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य सुनील कुमार निलंबित

जमुई/बिहार। जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार किया है। सिमुलतला आवासीय विद्यालय में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के मामले में बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने संस्थान के पूर्व प्राचार्य-सह-उप प्राचार्य सुनील कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में स्पष्ट संदेश गया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला पदाधिकारी द्वारा पत्रांक 212, दिनांक 16 मार्च 2026 को विस्तृत आरोप पत्र शिक्षा विभाग को समर्पित किया गया था। इस आरोप पत्र में विद्यालय के प्रशासनिक संचालन और वित्तीय प्रबंधन में गंभीर त्रुटियों और अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। विभागीय समीक्षा के बाद इन आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए बिहार शिक्षा विभाग ने बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की।

निलंबन अवधि के दौरान श्री सुनील कुमार का मुख्यालय पूर्णिया प्रमंडल स्थित क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक कार्यालय निर्धारित किया गया है। साथ ही, उनके विरुद्ध विभागीय जांच की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है, जिससे पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा सके।
यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि जिला पदाधिकारी के सख्त और दूरदर्शी नेतृत्व का उदाहरण भी है। उल्लेखनीय है कि पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद ही उन्होंने सिमुलतला आवासीय विद्यालय का दौरा किया था, जहां उन्होंने शिथिल कार्य संस्कृति, अनुशासनहीनता और शैक्षणिक गिरावट पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। उसी समय उन्होंने यह संकल्प लिया था कि इस प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा को पुनः स्थापित किया जाएगा और यहां पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

जिला पदाधिकारी के नेतृत्व में किए गए लगातार सुधारात्मक प्रयासों का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। महज एक वर्ष के भीतर विद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विशेष रूप से मैट्रिक परीक्षा 2026 में संस्थान ने न केवल राज्य स्तर पर टॉपर दिया, बल्कि ऐतिहासिक रूप से उत्कृष्ट परिणाम हासिल कर अपनी खोई प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित किया है।

प्रशासन का यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक सशक्त संदेश और उदाहरण है कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।

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