लक्ष्मीपुर/जमुई (Laxmipur/Jamui), 21 मार्च 2026, शनिवार : जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड में आठवीं कक्षा तक की वार्षिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया विधिवत शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार इस बार मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर केंद्र बनाए गए हैं, जहां बाहरी शिक्षकों की तैनाती कर कॉपियों की जांच कराई जा रही है। इस पहल से परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रखंड के सभी सीआरसी (क्लस्टर रिसोर्स सेंटर) स्तर के विद्यालयों को मूल्यांकन केंद्र के रूप में चयनित किया गया है। यहां प्राथमिक, उत्क्रमित और मध्य विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं निर्धारित समय के अनुसार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार मूल्यांकन कार्य में निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि बाहरी शिक्षकों को जिम्मेदारी देने से किसी प्रकार के पक्षपात की संभावना कम होगी और छात्रों के परिश्रम का सही आकलन हो सकेगा। उन्होंने सभी शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित मापदंडों का पालन करते हुए सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कार्य संपन्न करें।
वहीं सीआरसी संचालक एवं प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार तथा संकुल समन्वयक गंगासागर मिश्र ने बताया कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छात्रों की मेहनत को सही मूल्य देना और परीक्षा प्रणाली में उनका विश्वास बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी मूल्यांकन से न केवल परिणामों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
मूल्यांकन केंद्रों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और हर गतिविधि पर प्रशासनिक स्तर से नजर बनाए रखी जा रही है। उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दौरान शिक्षकों को विशेष सतर्कता बरतने और त्रुटिरहित मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं जैसे सिंकदर सिंह, पुनम कुमारी, पूजा भारती, पंकज दास, शेखर कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, इन्द्रदेव पासवान, सौरभ कुमार, बबीता कुमारी, सुधीर कुमार, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, जितेन्द्र कुमार सहित कई अन्य शिक्षाकर्मी मूल्यांकन कार्य में जुटे हुए हैं। सभी शिक्षक पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
शिक्षा विभाग की इस नई पहल को छात्रों और अभिभावकों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। माना जा रहा है कि इस तरह की पारदर्शी व्यवस्था से परीक्षा प्रणाली में विश्वास मजबूत होगा और भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।






