जमुई/बिहार। मानवता आज भी जीवित है, इसका सशक्त उदाहरण जमुई में देखने को मिला, जब एक जरूरतमंद बुजुर्ग महिला के लिए समय पर रक्तदान कर एक सेवा भावी युवक ने उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रेरणादायी घटना जमुई के एक निजी अस्पताल से जुड़ी है, जहां कृष्णपट्टी, जमुई निवासी 67 वर्षीय वीणा सिन्हा गंभीर रक्ताल्पता (एनीमिया) से पीड़ित होकर इलाजरत थीं।
चिकित्सकों द्वारा तत्काल रक्त की आवश्यकता बताए जाने के बाद परिजनों की चिंता काफी बढ़ गई। इस कठिन समय में पीड़िता के पुत्र संजीव कुमार सिन्हा ने सामाजिक संस्था प्रबोध जनसेवा संस्थान से संपर्क कर सहयोग की अपील की। उन्होंने संस्थान से जुड़े सहयोगी निक्कू जी एवं सेवा भावी सहयोगी सचिन जी को अपनी माता की गंभीर स्थिति से अवगत कराया।
सूचना मिलते ही संस्थान से जुड़े पर्यावरण मित्र एवं सेवा भावी सहयोगी सचिराज पद्माकर ने बिना किसी देर किए रक्तदान के लिए अपनी सहमति प्रदान की। मानवीय संवेदना और सामाजिक दायित्व का परिचय देते हुए वे तत्काल अस्पताल पहुंचे और रक्तदान कर पीड़िता के उपचार में अमूल्य सहयोग दिया। उनके इस त्वरित प्रयास से बुजुर्ग महिला को समय पर जीवनरक्षक सहायता मिल सकी, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली।
गौरतलब है कि सचिराज पद्माकर लंबे समय से समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनका यह रक्तदान न केवल एक मरीज के लिए संजीवनी साबित हुआ, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायी संदेश है कि जरूरत के समय किया गया छोटा-सा प्रयास भी किसी के जीवन को बचा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान सहयोगी निक्कू जी ने कहा कि आज के समय में निःस्वार्थ भाव से रक्तदान करना वास्तव में एक महान सेवा है। सचिराज पद्माकर ने जिस तत्परता, संवेदनशीलता और सेवा भाव के साथ रक्तदान किया, वह समाज के लिए अनुकरणीय है। उनके सहयोग से एक बुजुर्ग महिला को समय पर जीवनरक्षक सहायता मिल पाई।
इस संबंध में प्रबोध जनसेवा संस्थान के सचिव सुमन सौरभ ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने सचिराज पद्माकर के इस सराहनीय कार्य के लिए संस्थान की ओर से हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे सेवा भावी लोग ही समाज की असली पूंजी हैं।






