खैरा/जमुई। जमुई जिले के खैरा प्रखंड में स्थित गिद्धेश्वर नाथ स्थान न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक, पौराणिक और प्राकृतिक विरासत के कारण भी विशिष्ट पहचान रखता है। पहाड़ों, जंगलों और नदी-तालाबों के बीच बसे इस पावन धाम से जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोगों की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। गिद्धेश्वर नाथ मंदिर भगवान शंकर को समर्पित एक प्राचीन शिवधाम है, जहां स्वयंभू एवं विशाल आपरुपी शिवलिंग स्थापित है।
इस स्थल से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रामायण काल में लंकापति रावण द्वारा माता सीता के अपहरण के समय गिद्धराज जटायू ने इसी पर्वत पर रावण से भीषण युद्ध किया था। युद्ध के दौरान क्रोधित रावण ने जटायू के पंख काट दिए, जिससे वे यहीं गिर पड़े और अंततः उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। चूंकि जटायू गिद्ध थे, इसी कारण इस स्थान का नाम गिद्धेश्वर पड़ा और यहां स्थापित शिव मंदिर को गिद्धेश्वर नाथ मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।
इतिहासकारों और स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, गिद्धेश्वर नाथ मंदिर का निर्माण खैरा स्टेट के तत्कालीन तहसीलदार लाला हरिनंदन प्रसाद द्वारा लगभग 100 वर्ष पूर्व कराया गया था। समय के साथ यह मंदिर क्षेत्रीय आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। शिवलिंग के साथ-साथ यहां माता पार्वती, भगवान गणेश सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं, जहां श्रद्धालु विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।
गिद्धेश्वर नाथ धाम में प्रत्येक सोमवार, सावन माह, पूर्णिमा, बसंत पंचमी और महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इन पर्वों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हैं। खासकर महाशिवरात्रि और सावन में यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज से लोग शामिल होते हैं। क्षेत्र की परंपरा के अनुसार किसान अपनी फसल का पहला उपज भगवान शंकर को अर्पित करते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्राकृतिक दृष्टि से भी गिद्धेश्वर स्थान अत्यंत मनोरम है। चारों ओर फैले हरे-भरे पहाड़, घने वृक्ष, मंदिर के सामने स्थित शिवगंग तालाब और पास से बहती किउल नदी की कल-कल करती धारा श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करती है। यही कारण है कि यह स्थल धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एक आदर्श पिकनिक स्पॉट के रूप में भी विकसित होने की पूरी संभावनाएं रखता है। खासकर नववर्ष और अवकाश के दिनों में यहां बड़ी संख्या में लोग परिवार और मित्रों संग प्रकृति की गोद में समय बिताने पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि गिद्धेश्वर नाथ मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं। मुराद पूरी होने पर भक्त यज्ञ, अष्टयाम और भंडारे का आयोजन भी कराते हैं। वर्तमान में मंदिर और उसके परिसर का रखरखाव मंदिर समिति तथा निर्माणकर्ता के वंशजों के सहयोग से किया जा रहा है। गिद्धेश्वर नाथ धाम जमुई जिले की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान का प्रतीक है। यदि प्रशासन और जनसहयोग से इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र न केवल श्रद्धालुओं बल्कि सैलानियों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।








