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गुरुवार, 8 जनवरी 2026

जमुई : कड़ाके की ठंड से परेशान कक्षा 6 की छात्रा ने DM को लिखा पत्र, स्कूल बंद करने की उठाई मांग

जमुई/बिहार। जिले में लगातार बढ़ रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन के साथ-साथ स्कूली बच्चों की मुश्किलें भी काफी बढ़ा दी हैं। सुबह और शाम के समय शीतलहर के प्रकोप के कारण छोटे-छोटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल जाने को मजबूर हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए जमुई प्रखंड के खैरा स्थित कन्या मध्य विद्यालय की कक्षा 6 की छात्रा राधिका यादव ने एक सराहनीय और साहसिक पहल की है। राधिका ने जिलाधिकारी नवीन कुमार को पत्र लिखकर अत्यधिक ठंड को देखते हुए स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने की मांग की है।

अपने पत्र में राधिका यादव ने बच्चों की समस्याओं को बेहद सरल, सच्चे और मासूम शब्दों में रखा है। उन्होंने लिखा है कि कड़ाके की ठंड में सुबह-सुबह उठकर स्कूल के लिए तैयार होना बेहद कठिन हो जाता है। ठंड से बचने के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े होने के बावजूद ठंड से राहत नहीं मिलती। स्कूल पहुंचने के बाद भी खुले वातावरण और ठंडे कमरों में बैठकर पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है, जिससे पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

राधिका ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कई बार माता-पिता बच्चों की मजबूरी और स्वास्थ्य की चिंता किए बिना उन्हें जबरदस्ती स्कूल भेज देते हैं। बच्चों को ठंड में होने वाली शारीरिक परेशानी और बीमार पड़ने की आशंका पर ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने मासूमियत भरे अंदाज में यह भी लिखा कि ठंड के मौसम में बच्चे घर में रहकर पढ़ाई करना और खेलना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे वे सुरक्षित और स्वस्थ भी रह सकते हैं।
पत्र के अंत में राधिका यादव ने जिलाधिकारी से अपील की है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ठंड के दिनों में स्कूल बंद करने या कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार करें। राधिका की इस पहल को गुरुवार को उनकी सहेलियों खुशी कुमारी, तमन्ना कुमारी, पीहू प्रिया और खुशी शर्मा का भी समर्थन मिला। सभी छात्राओं ने एक स्वर में कहा कि भीषण ठंड के दौरान स्कूलों में ठंड से बचाव की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, ऐसे में स्कूल बंद करना ही बच्चों के हित में होगा।

छात्रा तमन्ना कुमारी ने कहा कि वे घर पर रहकर भी पढ़ाई कर सकती हैं और अपना पाठ्यक्रम पूरा कर सकती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि बच्चों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा तो स्कूल जाकर पढ़ने का कोई लाभ नहीं है। छात्राओं की यह सामूहिक मांग अब प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मासूम लेकिन गंभीर आवाज़ पर क्या निर्णय लेता है।

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