बरहट/जमुई। जिले के अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले मलयपुर पुलिस आरक्षित केंद्र में कानून के साए में अवैध दुकानदारी बेखौफ जारी है। सुरक्षा और अनुशासन के लिए बनाए गए इस पुलिस परिसर में सहूलियत के नाम पर शुरू हुआ अस्थायी इंतजाम अब खुले अतिक्रमण का रूप ले चुका है। स्थिति ऐसी है कि शाम ढलते ही पुलिस केंद्र का एक हिस्सा बाजार में तब्दील हो जाता है, जिससे पुलिस केंद्र की चौकसी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार मलयपुर पुलिस आरक्षित केंद्र के हजार बैरक के समीप प्रतिदिन शाम होते ही अंडा–पकौड़ा, लिट्टी–चोखा, फल, चाट, चिप्स, कुरकुरे, आलू पराठा सहित अन्य खाद्य सामग्री की दुकानें सज जाती हैं। आधा दर्जन से अधिक अनधिकृत दुकानों के लगने से पूरा इलाका अस्थायी बाजार जैसा नजर आने लगता है। इससे न केवल पुलिस परिसर की गरिमा और अनुशासन प्रभावित हो रहा है, बल्कि सुरक्षा घेरा भी कमजोर पड़ता दिख रहा है। इन दुकानों के बहाने बाहरी लोगों की बेरोकटोक आवाजाही पुलिस केंद्र के भीतर तक हो रही है, जो किसी भी दृष्टि से सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
सूत्रों की मानें तो प्रारंभ में प्रशिक्षणरत जवानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केवल फल की दुकान लगाने का मौखिक निर्देश दिया गया था, ताकि कठोर प्रशिक्षण के दौरान जवानों को आवश्यक पोषण मिल सके। लेकिन इसी ढील का फायदा उठाकर धीरे-धीरे अन्य दुकानदार भी वहां काबिज हो गए और अब स्थिति यह है कि पुलिस परिसर के भीतर कई तरह की अवैध दुकानें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। जबकि पुलिस केंद्र में पहले से ही स्वीकृत कैंटीन चालू है, जहां प्रशिक्षणरत जवानों के लिए नाश्ता और भोजन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में अलग-अलग दुकानों का संचालन स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
स्थानीय जानकारों और प्रशासनिक मामलों से जुड़े लोगों का कहना है कि पुलिस केंद्र जैसी संवेदनशील जगह पर अनुशासन और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। यहां हर गतिविधि पर सख्त निगरानी आवश्यक है, लेकिन सहूलियत के नाम पर अतिक्रमण को बढ़ावा देकर सुरक्षा जोखिम को स्वयं आमंत्रित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इन दुकानों में अनधिकृत रूप से बिजली का उपयोग किए जाने की भी चर्चा है, जिससे बिजली विभाग को आर्थिक नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किसकी मौन स्वीकृति से पुलिस परिसर के भीतर अवैध दुकानें संचालित हो रही हैं? संवेदनशील क्षेत्र में बाहरी लोगों की आवाजाही को कैसे मंजूरी दी जा रही है? नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, फिर भी जिम्मेदार विभाग और अधिकारी चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं?
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लाइन डीएसपी सुरेश प्रसाद शाह ने बताया कि पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में महिला और पुरुष प्रशिक्षु कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी सुविधा को देखते हुए सुबह और शाम केवल फल की दुकान खोले जाने की जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण केंद्र से बाहर निकलने की अनुमति प्रशिक्षुओं को नहीं होती है और अंडा–पकौड़ा सहित अन्य दुकानों के संचालन की जानकारी उन्हें नहीं है।
अब देखना यह है कि प्रशासन और पुलिस विभाग इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और संवेदनशील पुलिस परिसर को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कर सुरक्षा व्यवस्था को कितनी मजबूती प्रदान की जाती है।






