बरहट/जमुई। जिले के बरहट प्रखंड अंतर्गत पाड़ो गांव में ठंड से बचने के लिए की गई लापरवाही एक परिवार पर भारी पड़ते-पड़ते रह गई। सोमवार देर रात कमरे में बोरसी जलाकर सोए एक ही परिवार के तीन सदस्य दमघोंटू धुएं की चपेट में आकर बेहोश हो गए। मंगलवार सुबह करीब आठ बजे तक जब घर के भीतर कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। काफी देर तक आवाज देने के बावजूद अंदर से कोई जवाब नहीं मिला, जिसके बाद परिजनों ने साहस जुटाकर कमरे का दरवाजा तोड़ा।
दरवाजा खुलते ही कमरे के भीतर धुएं का घना गुबार फैला हुआ था और अंदर सुलेखा देवी तथा उनके दोनों बच्चे बेसुध हालत में पड़े मिले। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए परिजनों ने बिना देर किए तीनों को बरहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत नाजुक देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल जमुई रेफर कर दिया गया। सदर अस्पताल में इलाज के बाद तीनों की हालत में सुधार बताया जा रहा है और वे फिलहाल खतरे से बाहर हैं।
बेहोश हुए लोगों की पहचान पाड़ो गांव निवासी सुलेखा देवी (29 वर्ष), उनकी छह वर्षीय बेटी प्रिया कुमारी और नौ वर्षीय पुत्र रिक्की कुमार के रूप में की गई है। घटना की जानकारी देते हुए सुलेखा देवी के देवर मन्नु शर्मा ने बताया कि सोमवार रात अत्यधिक ठंड के कारण भाभी और बच्चों ने कमरे के भीतर बोरसी जलाई थी। ठंड से राहत पाने के लिए उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और उसी हालत में सो गए। रात भर जलती बोरसी से निकले धुएं ने धीरे-धीरे कमरे में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर दी, जिससे तीनों दम घुटने के कारण बेहोश हो गए।
इस घटना को लेकर बरहट थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने बताया कि मामले की सूचना उन्हें प्राप्त हुई है। पीड़ितों को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि ठंड से बचाव के लिए बंद कमरे में बोरसी या अंगीठी जलाने से परहेज करें, क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकता है।






