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बाबा कोकिलचंद के त्रिसूत्रीय संदेश आज भी हैं प्रासंगिक जो समाजिक क्रांति का आधार बन सकता है : ज्योतिंद्र मिश्र

गंगरा/गिद्धौर/पटना (Gangra/Gidhaur/Patna), 10 जनवरी : जमुई की ऐतिहासिक धरती पर सदियों से बाबा कोकिलचंद धाम गंगरा बाबा कोकिलचंद की आध्यात्मिक दिव्यता, उनके पुरुषार्थ और मानवीय चरित्र की प्रखरता से ओत प्रोत है। परिस्थिति विशेष में जब कोई भी देहधारी सदाचार, और सद्गुणों का वरण कर लेता है तो उस देह में देव का निवास हो ही जाता है। इस भारत भूमि पर शतशः उदाहरण हैं। आज जब भौतिक सुखों का अम्बार लगा है। लोग इसे जुटाने में कोई कोर कसर नहीं करते तब भी हर व्यक्ति का सुख चैन छिन गया है। उक्त बातें माँगोबन्दर निवासी बिहार सचिवालय सेवा से सेवा निवृत्त साहित्यकार, गीतकार, लेखक ज्योतीन्द्र मिश्र ने कही।

ज्योतीन्द्र मिश्र बाबा कोकिलचंद विचार मंच 21 सदस्यीय मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख सदस्यों में से एक हैं एवं वर्तमान में पटना में निवास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान हालत में बाबा कोकिलचंद जी के विचार पुनः प्रासंगिक हो गए हैं। बाबा कोकिल चन्द विचार मंच, बाबा के विचारों को तीन सूत्रों में समेकित किया है। त्रिसूत्र के अंतर्गत तीनों बिंदु सामाजिक नव चेतना से जुड़े हुए हैं :
(१) मद्य निषेध
(२)नारी सम्मान
(३)अन्न देव का सम्मान 

आधुनिकता की दौर में मद्यपान, स्त्रियों का असम्मान,और अन्न की बर्बादी में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसी को नियंत्रित करने के लिए गंगरा धाम के कुछ युवा सक्रिय हुए हैं। समाज को अधोगति से बचाने का कहीं कोई प्रयास हो रहा हो तो प्रवुद्ध जनों को आगे आना चाहिए। मुझे संभावना दिखाई देती है कि भविष्य में बाबा के ये त्रिसूत्र सामाजिक क्रांति का आधार बन सकता है। 

श्री मिश्र ने कहा कि हमारे देश में नारी रक्षा, अन्न रक्षा और जीवन रक्षा से जुड़े प्रश्न आये दिन चिंता का कारण बनते हैं। इसलिए महान दूरदर्शी बाबा कोकिल चंद के तीनों सूत्र नारी का सम्मान, अन्न का अभिरक्षण एवं मद्य निषेध आधुनिक होते आम जनों के लिए अति उपयोगी सूत्र हैं। यही कारण है कि बाबा के प्रति जन मानस की आस्था को सबलता मिली है। आस्था के इस केंद्र को राज्य सरकार प्रतिष्ठा प्रदान करती है तो यह गौरव की बात होगी।इस मंच से जुड़े  सभी सदस्यों के हित की शुभ कामना करता हूँ। मंच की प्रतिष्ठा बढ़े!  

युवा समाज सेवी चुन चुन जी के सत्प्रयास सराहनीय हैं। युवा समाज चिंतक श्री सुशांत जी के विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ। बाबा कोकिलचंद धाम गंगरा को धार्मिक आस्था के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सार्थक पहल होनी चाहिए।