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पटना : महावीर कैंसर संस्थान के रेडियेशन विभाग के छात्रों ने धूमधाम से मनाया शिक्षक दिवस

 

Patna/पटना (शुभम मिश्र) :-  

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े,काके लागूं पाय,

बलिहारी गुरू आपने,गोविन्द दियो बताय । " 

संत कबीर की यह पंक्तियाँ भारतीय सभ्यता और संस्कृति में गुरू की महत्ता को व्यक्त करती है।यह कथन केवल विद्यालयों में ही नहीं वरन अस्पतालों में भी देखने को मिला है। जी हाँ ..! मैं बात कर रहा हूँ,भारत के समस्त कैंसर अस्पतालों में सूमार महावीर कैंसर एवं शोध संस्थान पटना,जहां सिर्फ कैंसर की चिकित्सा ही नहीं की जाती बल्कि इसकी पढ़ाई भी उच्च कोटि की होती। यहां मरीज के साथ व्यवहार करने के तरीके एवं सलीके में सेवा भाव एवं समर्पण देखने को मिलता है। 

इस वर्ष रेडियेशन विभाग के प्रथम एवं फाइनल वर्ष के छात्रों ने शिक्षक दिवस को अस्पताल प्रांगण में ही धूमधाम से मनाया। इस बाबत कार्यक्रम आयोजक आदर्श,निशांत, शुभम, उज्जवल, रितेश,शिवम, नवीन, पवन, ने बताया कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में गुरू का एक सर्वोच्च स्थान होता है जिसे हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखनी चाहिए।उनलोगों ने यह भी कहा कि यहां के चिकित्सक,फीजिसीस्ट, टेक्नोलोजिस्ट हमारे गुरू हैं, जिनके सम्मान के लिए हमलोगों ने आज यह कार्यक्रम आयोजित किया है।वहीं, इस कार्यक्रम की शुरुआत रेडियेशन विभाग की अध्यक्षा डा॰ विनीता त्रिवेदी,एकेडमिक इंचार्ज डा॰ ऋचा चौहान,वरीय चिकित्सक डा॰मुकुल मिश्रा,डा॰उषा,डा॰कंचन, पेलियेटिव केयर इंचार्ज डा॰रीता रानी,रिसर्च यूनिट के डा॰अरूण ने केक काटकर शुभारंभ किया।उनलोगों ने कहा कि जीवन में शिक्षक हमें केवल पढ़ाते ही नहीं बल्कि हमे जीवन के अनुभवों से गुजरने के दौरान हमें अच्छे बुरे के बीच फ़र्क करना भी बतलाते हैं। हमें प्रेरणा देने वाले,सच्चा रास्ता बतलाने वाले,शिक्षा देने वाले को गुरू मानकर सम्मान करना चाहिए। इस कार्यक्रम में चिकित्सकों के अलावे फीजिसीस्ट सलमा, निर्जरा महंता,शान्तनु मैथ्यू ,वरीय टेक्नोलोजिस्ट संजय शर्मा, मिथलेश कुमार,ओमप्रकाश कुमार,विजय शर्मा, संदीप कुमार,अंजलि मेहता,अंशु कुमारी,रागिनी,वर्षा, अंशु भारती, ऋतुपर्णा के अलावे अन्य टेक्नोलोजिस्ट भी मौजूद थे। 

कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थिगण ◆  gidhaur.com

इस दौरान वरीय टेक्नोलोजिस्ट संजय शर्मा एवं मिथलेश कुमार ने बताया कि " शिक्षक समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं। वो अपने छात्रों को ज्ञान की प्रतिमूर्ति बनाने के लिए डांटते हैं पर उनकी बातों का बुरा नहीं मानना चाहिये।" वहीं बतादें कि पूरे देश में आज के दिन शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा 1962 से शुरू की गई थी। आज के दिन ही भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था।उनकी इच्छा थी कि उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में बनाया जाय।ध्यातव्य हो कि राधाकृष्णन जी को 27 बार नोबेल पुरस्कार हेतु नामित किया गया था।जबकि 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था । उक्त अवसर पर संस्थान के चिकित्सकों के अलावे छात्र गोलू, निशांत, वर्णिका,पिंकी, राखी, पूजा, शिखा, रेशमा, प्रतिभा, ज्योति कुमारी , टेक्नोलोजिस्ट राजेश कुमार, आनंद कुमार शर्मा, भोगेन्द्र भास्कर,मनीष कुमार,पलाश दास,प्रभात रंजन, सोमेन मंडल आदि  मौजूद थे।