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गिद्धौर निवासी 70 वर्षीय कवि-साहित्यकार प्रभात सरसिज ने होम आइसोलेशन में रहकर दी कोरोना को मात

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui) : गिद्धौर निवासी हिंदी के सुविख्यात कवि-साहित्यकार प्रभात सरसिज ने 70 वर्ष की उम्र में कोरोना संक्रमण को मात दे दी है। वे फिलहाल पटना में रह रहे हैं और वहां ही वे कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 अप्रैल को आरटी-पीसीआर के लिए उनका सैंपल लिया गया था, जिसकी रिपोर्ट 26 अप्रैल को पॉज़िटिव आई थी।

जिसके बाद उन्होंने खुद को घर में ही आइसोलेट कर लिया था। साथ ही चिकित्सकीय परामर्शानुसार अपनी दवाइयां जारी रखीं। इस बीच दो बार हुए आरटी-पीसीआर टेस्ट में वह कोरोना पॉजिटिव ही पाए गए थे। प्रभात सरसिज के स्वास्थ्य लाभ के लिए उनके मित्रों, शुभचिंतकों व परिवारजनों की ईश्वर से लगातार प्रार्थनाएं जारी थी। शुक्रवार को पुनः हुए आरटी-पीसीआर में उनका कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव आया। यह ईश्वर की असीम कृपा, उनके धैर्य और परिवारजनों एवं शुभचिंतकों के शुभकामनाओं का ही प्रतिफल है।
प्रभात सरसिज कोरोना संक्रमित होने के बाद लगातार चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दवाइयों का सेवन करते रहे। साथ ही नियमित घरेलू उपचारों एवं योग-प्राणायाम करते हुए उन्होंने खुद को संक्रमण मुक्त किया। होम आइसोलेशन में रहते हुए 70 वर्ष की उम्र में कोरोना संक्रमण को मात देकर प्रभात सरसिज लोगों की उम्मीद के किरण बने हैं। उनके स्वस्थ हो जाने से अन्य लोगों में भी यह उम्मीद जागृत हुई है कि होम आइसोलेशन में रहते हुए सभी निर्देशों का पालन कर कोरोना संक्रमण को मात दिया जा सकता है।
70 वर्षीय प्रभात सरसिज हिंदी साहित्य के जानेमाने हस्ती हैं। वे जनचेतना के कवि के रूप में जाने जाते हैं। उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रभात सरसिज की कविता संग्रह 'लोकराग', 'गजव्याघ्र', 'आवारा घोड़े', 'मुल्क में मची है आपाधापी' उनके प्रशंसकों के साथ ही आलोचकों द्वारा भी सराही गई है। लेखन में उनके योगदान को देखते हुए विभिन्न बड़े मंचों पर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।