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पटना : राज्य के सभी थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की कवायद शुरू

 पटना (PATNA) :- बिहार के सभी थानों को जिला, फिर राज्य मुख्यालय से जोड़ा जायेगा। इसका मकसद इतना है कि सभी थाने हर तरह की सूचना ऑनलाइन अपलोड करेंगे। इससे संबंधित कोई अन्य विभाग अगर किसी मामले को लेकर कोई छानबीन करना चाहते हैं, तो वह अपने कार्यालय में बैठे-बैठे कर पायेंगे।



काम पूरा होते ही मैनुअल काम बंद हो जायेगा। एफआईआर से लेकर किसी भी मसले पर रिपोर्ट लगाने तक की कार्रवाई ऑनलाइन किया जायेगा।संबंधित व्यक्ति अपने काम की ट्रैकिंग भी कर पायेगा। खास बात यह है कि इसके तहत सबसे अधिक काम थानों के जिम्मे है, सभी थानों को इस बाबत निर्देश जारी किया जा चुका है।

 पुलिस मुख्यालय के सूत्रों की मानें, तो थानों के लिए सात तरह के फाॅर्म तय किये गये है। बता दें, थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की कवायद वर्ष 2009 में शुरू हुई थी। केंद्र सरकार ने योजना बनायी कि देश भर के थानों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा जाये, बिहार में वर्ष 2012 में सरकार ने इसको लेकर काम शुरू किया।

भागलपुर और पटना में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में डिजिटल प्लेटफाॅर्म तैयार भी किया गया। सूत्रों की मानें तो उस समय वयमटेक का चुनाव काम के लिए किया गया था, परंतु कुछ कारणों से इसका कांट्रैक्ट रद्द कर दिया गया था। वर्ष 2015 से फिर खोज शुरू हुई, लेकिन कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद गृह विभाग ने कोर्ट को बताया कि विभाग के पास कंप्यूटर साक्षर पदाधिकारी नही है और न ही विभाग के पास कार्य करने के किये कंप्यूटर। जिसके किये बहुत पैसे की जरूरत है और साक्षर पुलिसकर्मी की। 


याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओम प्रकाश ने कोर्ट को अवगत कराया कि 2008 मुम्बई बम ब्लास्ट के बाद भारत सरकार ने एक प्रोजेक्ट CCTNS (Crime and Criminal Tracking Networking System) लाया था जिसपर प्रत्येक राज्य को काम करना था एवम उसके लिए भारत सरकार एवं बिहार सरकार का कुल फंड मिलाकर 280 करोड़ रुपया अभी बिहार सरकार के गृह विभाग के पास है।

जिसके बाद सरकार को कोर्ट ने फटकार लगाई और कोर्ट ने आदेश दिया कि शपथ पत्र के माध्यम से बताये कि कब तक बिहार के थानो को डिजिटल बिहार सरकार करेगी।

सरकार ने शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को बताया कि अक्टूबर 2020 तक पूरे थानों को डिजिटल कर दिया जाएगा एवं साथ ही साथ लगभग 35 हजार पुलिसकर्मियो को भी साक्षर किया जाएगा।

उक्त मामला पुनः दिनांक 8 दिसम्बर 2020 को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवम जस्टिस संजय कुमार के पीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि गृह विभाग ने शपथ पत्र के माध्यम से कहा था कि बिहार के थानों को डिजिटल अक्टूबर 2020 तक कर दिया जाएगा लेकिन अब तक नही हुआ है।

सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि डिजिटल करने का प्रक्रिया कोरोना की वजह से बंद थी अब पुनः शुरू हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि प्रधान सचिव आमिर सुब्हानी 10 दिन के अंदर शपथ पत्र के माध्यम से बताए ,कि अभी तक क्यों नही प्रक्रिया पूरी हुई है। पुनः22 दिसम्बर को सुनवाई की जाएगी।