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सोनो: बाबा लक्ष्मीनारायण महोत्सव में कोरोना पर आस्था भारी, प्रदेश भर से जूटे भक्त

 


सोनो / Sono News :- मंगलवार को महेश्वरी स्थित बाबा लक्ष्मीनारायण मंदिर ,श्रद्धालुओं से पटा दिखा। बाबा के वार्षिकोत्सव में शामिल होने पूरे प्रदेश से लोग यहां पहुंचे। 16वीं शताब्दी में स्थापित बाबा लक्ष्मीनारायण के प्रति लोगों में अटूट आस्था देखने को मिली। सोमवार को पूरे दिन धर्म परायण भक्तों का सैलाब मंदिर परिसर में उमड़ता रहा। दोपहर को मंदिर प्रांगण में लाल पताका से लिपटे पावन ध्वज के प्रतिष्ठापित होते ही हाथों में बाबा का प्रिय नैवेद्य दहिऔरी की थाली लिए श्रद्धालु कतारबद्ध हो बाबा को नैवेद्य अर्पित किए तथा मन्नतें मांगी। भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पंचायत के मुखिया अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पूजा समिति के सदस्यों द्वारा मुख्य गली से मंदिर तक जाने वाले गलियारे को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। गांव के पूरब में बहने वाली कलोथर, पश्चिम में गोरिया व उत्तर दिशा में प्रवाहित होने वाली योगिया नदी, मंगलवार को भक्तों के सैलाब को देखकर 400 वर्ष पूर्व के इतिहास का स्मरण दिला रही थी,जब इसी गांव के दो भक्तों राम सिंह और राम पांडेय ने बाबा लक्ष्मी नारायण को यहां स्थापित किया था।



महेश्वरी वासियों के लिए महत्वपूर्ण है अहोरात्रि का दिन


महेश्वरीवासियों के लिए कार्तिक पूर्णिमा,बाबा के अहोरात्रि का दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। पूरे ग्रामवासी इस दिन बाबा की पूजा में शामिल होने आए श्रद्धालुओं के आतिथ्य सत्कार में लगे रहते हैं। सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ को देखकर मानो लग रहा था कि इलाके की सभी सड़कें महेश्वरी की ओर ही मुड़ गई हो। क्या आम, क्या खास, सभी ने पंक्तिबद्ध होकर बाबा की पूजा की तथा नैवेद्य अर्पित किया। हाथों में नेवैद्य की थाली ले पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह, विधायक सुमित कुमार सिंह भी बाबा की पूजा करने यहां पहुंचे। प्रतिवर्ष उनके परिवार का कोई न कोई सदस्य बाबा लक्ष्मी नारायण के पूजा में शामिल होने हेतु निश्चित यहां आता है।


ध्वजारोहण के बाद शुरू हुई संयम और साधना की शर्तें


सोमवार को दोपहर एक बजे के करीब बाबा मंदिर परिसर में ध्वजारोपण किया गया। ध्वजारोहण के दौरान श्रद्धालु बाबा लक्ष्मीनारायण का जयकारा लगाते रहे।वही ध्वजा का अवरोहण आज दोपहर बाद किया जाएगा।ध्वजारोहण के बाद महेश्वरी के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलता है। मंदिर परिसर में ध्वजारोपण के बाद आबाबा की आरती हुई तथा ब्राह्मण भोजन करवाया गया। ब्राह्मण भोजन के बाद बाबा को नैवेध अर्पित किया जाने लगा। बाबा के भक्त राम सिंह के परिवार से सर्वप्रथम बाबा को दहिऔरी चढ़ाया गया। इसके बाद अन्य श्रद्धालुओं द्वारा नैवेध अर्पित किया गया। आज महेश्वरी के प्रत्येक घरों में दहिऔरी बनाया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद बाहर से आए श्रद्धालुओं को गांव वालों ने दही चूड़ा व प्रसाद खिलाया।पूरा गांव आतिथ्य सेवा में लगा रहा है। यही महेश्वरी की सनातन परंपरा भी है।


सुरक्षा के थे पुख्ता इंतजाम,कोविड को ले बरती गई सतर्कता 


पूजा अर्चना के लिए आए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर परिसर के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार पंडित सहित पुलिस के जवान, वाहनों को पार्किंग स्थल पर लगवाते नजर आए।मंदिर परिसर में महिला पुलिस भी तैनात थी। इसके साथ ही मुखिया अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में गांव के दर्जनों युवाओं का दल श्रद्धालुओं को कतारबद्ध करते दिखा।कोरोना काल में हो रहे बाबा लक्ष्मीनारायण की पूजा को लेकर पूजा समिति के द्वारा भी सतर्कता बरती जा रही थी। लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सख्त हिदायत के साथ ही बिना मास्क के श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। वहीं चिकित्सा विभाग की टीम भी मंदिर परिसर में मौजूद थी। पूरे गांव का माहौल भक्तिमय बना हुआ था।




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