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गिद्धौर : सामान ढुलाई के लिए आज भी 'धन्नो' का ही सहारा, इक्के-दुक्के टमटम हैं मौजूद

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui) : राजे-रजवाड़ों में घोड़ा और रथ का इस्तेमाल किया जाता था। बाद में तांगा यानी टमटम का भी खूब प्रयोग हुआ। जैसे-जैसे विकास होता गया, वैसे-वैसे टमटम का इस्तेमाल कम होता गया। गिद्धौर में टेम्पो की संख्या बढ़ी और लोग टमटम की बजाय टेम्पो का प्रयोग करने लगे।
घोड़ों की टाप मद्धिम होती गई और टमटम का दर्शन भी दुर्लभ हो गया। कभी-कभार ही टमटम नजर आने लगे। गिद्धौर बाजार में अब भी इक्के दुक्के टमटम मौजूद हैं। सामान की ढुलाई के लिए अब भी गिद्धौर में टमटम का प्रयोग हो रहा है। मुख्य सड़क पर कभी कभी घोड़ों की टापें सुनाई दे जाती हैं। बड़े बंडलों को टमटम पर लादकर धड़ल्ले से गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है। नई पीढ़ी भी गाहे बगाहे देख लेती है कि टमटम होता कैसा है।