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प्रशांत भूषण न्यायिक क्षेत्र के कोहिनूर हैं, उन्हें सजा देने जैसी बातें लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण : अमन समिति

 

पटना : प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण न्याय के क्षेत्र में देश के कोहिनूर हैं। वे सर्वश्रेष्ठ अवार्ड के योग्य व्यक्तित्व हैं, और हमारे देश में उन्हें सजा देने की बातें हो रही हैं, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उक्त बातें अमन समिति के संयोजक धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा।


20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच प्रशांत भूषण मामले में सजा सुनाएगी। कोर्ट द्वारा उन्हें पहले ही उन्हें दोषी करार दिया जा चुका है। प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के उस तस्वीर पर ट्विटर के माध्यम से व्यंग्य किया था जिसमें मुख्य न्यायाधीश भाजपा नेता की 50 लाख की मोटरसाईकिल पर  बैठे हुए हैं।


कोर्ट ने प्रशांत भूषण के उस व्यंग्य पर संज्ञान लेते हुए उन पर कोर्ट की अवमानना के तहत मुकदमा चलाया और उन्हें दोषी भी करार दे दिया। दूसरी तरफ प्रशांत भूषण का कहना है कि न्यायाधीश की आलोचना करना कोर्ट की अवमानना नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि अगर भ्रष्ट न्यायाधीश को कोई भ्रष्ट नहीं कहेगा तो उन पर महाभियोग कैसे चलेगा।


पिछले सप्ताह कोर्ट द्वारा प्रशांत भूषण को दोषी करार दिए जाने के बाद देशभर में इसके खिलाफ आवाजें भी उठ रही हैं। 


इन सबके बीच अमन समिति के संयोजक धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रशांत भूषण जैसे ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ एवं साहसी वकील को जिस समय न्याय के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ अवार्ड से नवाजा जाना चाहिए था, उस समय हमारे देश में उन्हें सजा देने एवं जेल भेजने की बातें की जा रही हैं, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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