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Breaking : भारत में नई शिक्षा नीति को मंजूरी, जानिए क्या हुए हैं बड़े बदलाव


News Desk | Abhishek Kumar Jha】:-

भारतीय शिक्षा के ढांचे को बदलने के मद्देनजर शिक्षा नीति के तहत अब सरकार ऐसा सिस्टम विकसित कर रही है जो 21वीं सदी (21st Century) के लक्ष्य के अनुरूप भारतीय परंपराओं से जुड़ा हो। अब आप ये सोचेंगे कि हम आपको ऐसा क्यो कह रहे हैं। वो इसलिए क्योंकि भारत में 34 साल बाद भारत की नई शिक्षा नीति (New Education Policy) आई है, जिसके तहत स्कूल-कॉलेज (School & colleges) की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं।


 दरअसल, मोदी सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति को मंजूरी देने के बाद कैबिनेट की बैठक में इसपर फैसला लिया गया, जिसकी जानकारी परोसने के लिए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Central Minister Prakash Javdeker) प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) की।
बताया गया कि, ढाई लाख ग्राम पंचायतो, 6600 प्रखंड, 676 जिलों से प्राप्त सलाह पर विचार करके नई शिक्षा नीति की पहल की गई है। इसके तहत ये मुख्य बदलाव किए गए हैं :-

◆  एक साल के बाद सर्टिफिकेट (Certificate Course), दो साल के बाद डिप्लोमा (Diploma), तीन या चार साल के बाद डिग्री (Degree) प्राप्त कर सकेंगे।

◆ शिक्षा के इस नई नीति में मेजर प्रोग्राम के अलावा माइनर प्रोग्राम का भी चयन बच्चे कर सकेंगे।

◆ आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से अपनी पढ़ाई ड्रॉप करने वाले विद्यार्थियों को जो आउट होना पड़ता था वो अब पुनः वापस अपने स्ट्रीम में शामिल हो सकते हैं।

◆ कक्षा 6 से ही वोकेशनल कोर्स (Vocational Course) शुरू कर दी जाएगी।  इसके बाद छात्र को अपनी मर्जी के हिसाब से विषयों का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। मतलब ये कि यदि कोई कोई छात्र साइंस के साथ आर्ट्स विषय मे रूचि रखता है और पढ़ने को इच्छुक है तो वो अपनी इच्छा पूरी कर सकता है।

◆  स्कूली शिक्षा में 10+2 अब बीते दिनों की बात हो जाएगी। इसके जगह पर 5+3+3+4 सिस्टम लागू की गई है। इसका तात्पर्य है कि प्राइमरी (primary) से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवी तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवी तक तीसरा हिस्सा और 9वी से 12वी तक आखिरी हिस्सा होगा। वहीं, 12वीं में बोर्ड की परीक्षा होगी, लेकिन उसमें भी कुछ बदलाव होंगे। मतलब ये कि अब 10वीं में बोर्ड एग्‍जाम नहीं होंगे।

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विदित हो, सन 1985 ई में मानव संसाधन मंत्रालय 'शिक्षा मंत्रालय' के नाम से जाना जाता था अब फिर से इस मंत्रालय को इसी नाम से जाना जाएगा।
बताया जाता है कि, नई शिक्षा नीति को लेकर राज्यों में शिक्षा के स्तर और नियमों को लागू कराने के लिए हर राज्य के लिए स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण तैयार होंगे।  नई नीति में एक राष्ट्रीय शिक्षा आयोग (National Education Commission) बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। पीएम मोदी (PM Modi) इसकी मोनिटरिंग स्वयं करेगे। यह वो पैनल होगा जिससे देश में शिक्षा के माध्यम को विकसित कर उन्हें लागू करने व उसका मूल्यांकन और पुनर्निरीक्षण करने के कार्य मे मिल का पत्थर साबित होगा।

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