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मैट्रिक के बाद आगे किस स्ट्रीम से पढ़ाई करें ये निर्धारित करने से पहले अपने लक्ष्य को तय करें : गुरु रहमान



पटना | अनूप नारायण :
मैट्रिक परीक्षा में सफल होने के बाद विद्यार्थियों में यह सवाल रहता हैं कि अब आगे किस स्ट्रीम से पढ़ाई करें।यह स्वाभाविक है मैट्रिक के बाद इस तरह के प्रश्न मन में उभरते हैं क्योंकि मैट्रिक वह पड़ाव हैं जो भविष्य की दिशा और दशा तय करता हैं।मैट्रिक के बाद विद्यार्थियों में किस स्ट्रीम से पढ़ाई करें ये सवाल तो रहते ही हैं वहीं कई विद्यार्थी यह भी सोचते है कि साइंस लेकर पढ़ते है क्योंकि साइंस अच्छा हैं।लेकिन मैं आपको बता दु की कोई स्ट्रीम बुरा नहीं हैं।लेकिन आप अपने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीम का चयन करें और उसी स्ट्रीम से आगे पढ़ाई करें जो आपके लक्ष्य को पाने में लाभदायक हो।जैसे अगर आपको डॉक्टर ,इंजीनयर इत्यादि बनना आपका लक्ष्य है तो निःसन्देह आप साइंस स्ट्रीम से आगे पढ़ाई करें।लेकिन वहीं अगर आपका लक्ष्य डॉक्टर इंजीनियर बनना नहीं हैं कुछ और है तो आप अपने लक्ष्य के अनुसार उसी स्ट्रीम का चयन करें।जैसे अगर आपको कॉमर्स क्षेत्र में आगे बढ़ना हैं तो आप बिना सोचे कॉमर्स से इंटर करे।ठीक ऐसे ही जिस क्षेत्र में आपकी रुचि हो,जिस क्षेत्र में आप आगे बढ़ना चाहते हैं उसी विषय का चयन करें और अभी में अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए अत्यधिक पढ़ाई करें।

आमतौर पर ऐसा होता है कि स्टूडेंट एक बेहतरीन गाइडलाइन नहीं मिल पाने के वजह से वे सही रास्ते का चयन नहीं कर पाते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि उनको लक्ष्यों तक पहुँचने में अधिक समय लगता हैं एवं अधिक कठिनाइयां भी होती हैं।क्योंकि सही समय पर बेहतरीन दिशा निर्देश नहीं मिलने पर ऐसा देखा जाता हैं कि बहुत से स्टूडेंट इधर से उधर भटकते हैं।जैसे कि कोई स्टूडेंट पहले आईआईटी की तैयारी किया तो फिर नहीं होने पर  बैंकिंग की तैयारी शुरू कर दिया  तो फिर कुछ समय बाद यूपीएससी की तैयारी करता है।इस तरह से लक्ष्यों से विचलित होने से मुकाम तक पहुचना मुश्किल हो जाता हैं।इसलिए किसी एक लक्ष्य को निर्धारित करें एवं उसी के अनुसार विषयों का चयन करें और मैट्रिक के बाद ही एक लक्ष्य को निर्धारित कर उस मुकाम तक पहुँचने के लिए संघर्ष करे तभी सफलता मिलेगी।

मैट्रिक के बाद आप अपने लक्ष्य को ध्यान में रखें अपने रुचि में ध्यान रखिये तब स्ट्रीम का चयन करें।एवं उसके बाद ही अपने लक्ष्य को पूरा करने में दिलों जान से जुट जाएं।कभी ये न सोचें कि कोई स्ट्रीम छोटा हैं या कोई स्ट्रीम बड़ा हैं और यह भी कभी न सोचें कि मेरा लक्ष्य छोटा हैं दुसरो का लक्ष्य बड़ा,बल्कि अपने लक्ष्य को बड़ा समझे और उसे पूरा करने के लिए लगातार जूटे रहे।क्योंकि लक्ष्य बड़ा रखने से कुछ नहीं मिलता बल्कि उसे पूरा करने से मिलता हैं।जैसे मान लीजिए कि आपका कोई साथी हो उसने कहां की मेरा लक्ष्य आईएएस बनना हैं और अगर आपका लक्ष्य एक क्लर्क बनना हैं और अगर आपका साथी संघर्ष नहीं करता हो और आप लगातार मेहनत कर रहे हो तब आप तो जरूर सफल हो जाएंगे क्योंकि आप मेहनत कर रहे है लेकिन आपका साथी जो कि बिल्कुल मेहनत नहीं कर रहा हैं तो वे सफल कैसे होगा तो उसे बड़ा लक्ष्य ही रखने का क्या फायदा जब सफलता ही नहीं मिली वहीं आप छोटा ही लक्ष्य रखे लेकिन सफल तो हो गए।हाँ लक्ष्य बड़ा रखना चाहिए लेकिन उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी दिलों जान से जुटे रहना चाहिए तभी बड़ा लक्ष्य रखने का भी कोई फायदा अन्यथा कोई फायदा नहीं हैं।इसलिए चाहे आपका कोई लक्ष्य भी लक्ष्य को उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते रहिए तभी सफलता मिलेंगी।