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गिद्धौर के गंगरा स्थित बाबा कोकिलचंद का इतिहास होगा कलमबद्ध

न्यूज़ डेस्क |अभिषेक कुमार झा】 :-

धर्म और अध्यात्म का पर्याय रहा गिद्धौर की धरती से जुड़े गंगरा गांव की पहचान बाबा कोकिलचंद से जुड़ी हुई है। लोगों की आस्था और बाबा के यश से लोगों ने उन्हें मानवदेव व देवावतार जैसी संज्ञाओं से जोड़ा है।


इतिहास, धर्म, और मानव कृति के तह पर संचित  बाबा कोकिलचंद के त्रिसूत्रों का अनुसरण आज कोरोना काल मे भी शिक्षाप्रद सिद्ध हो रहि है। गिद्धौर के साथ साथ देवघर, सोनो, आदि जगहों में स्थापित बाबा की पिंडी उनके अस्तित्व को अक्षुण्ण रख रही है। बाबा कोकिलचंद के प्रेरणात्मक जीवन, त्याग, समर्पण, बलिदान के संगम से गुथे इनकी संघर्षगाथा को कलमबद्ध करने को लेकर समिति के सदस्यों ने सहमति जताई है। इसके पूर्व भी पिछले वर्ष बाबा जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन हो चुका है।

इस संदर्भ में जानकारी साझा करते हुए   संयोजक चुनचुन कुमार बताते हैं कि बाबा कोकिलचंद के जीवनी को रेखांकित कर उन्हें कलमबद्ध  करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ उनके अस्तित्वों की जानकारी में प्रगाढ़ता आएगी, बल्कि वर्तमान पीढ़ियों में भी आध्यात्मिक और धार्मिक गुणों का संचार हो सकेगा।