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गिद्धौर @ रमज़ान : दुआओं में उठे लाखों हाथ, फ़िज़ाओं में बिखरी आज़ान की गूंज

न्यूज़ डेस्क| अभिषेक कुमार झा 】:-

चांद की तस्दीक होने के बाद शनिवार को मुस्लिम समुदाय से ताल्लुकात रखने वाले लोगों ने एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी और अपने रोजे व तराबी की तैयारी में जुट गए।  हालांकि, कोरोना वायरस के साये में जिलेवासी रमजान माह सादगी पूर्ण तरीके से मना रहे हैं। समुदाय के लोगों द्वारा घर में रहकर ही इबादत और तराबी की नमाज अदा की गयी।



 *- बाजार में नहीं बरसी रहमत -*

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए 3 मई तक घोषित देशव्यापी लॉकडाउन रोजेदार जिले भर के बाजारों से उन चीजों की खरीदारी कर रहे हैं जो कि रमजान उल मुबारक में विशेष तौर पर काम आती हैं। हालांकि कोरोना के प्रकोप से रमजान मुकद्दस महीना को लेकर  बाज़ार में वो रहमत नहीं बरसी, जो हर साल देखने को मिलती है पर शनिवार की सुबह गिद्धौर के लॉर्ड मिंटो टावर चौक के इर्द गिर्द लगे ठेलों व किराने दुकानों पर बिना सोशल डिस्टनसिंग के खरीददारी का दौर जारी रहा। रमजान को लेकर गिद्धौर बाजार में ब्रांडेड सेवइयां का स्टॉक उपलब्ध है।



    *- मुस्लिम समुदाय का पाक माह होता है रमज़ान -*

इस पर्व को लेकर जानकारी देते हुए रोजा रखने वाले मो. मन्ज़ूर आलम, मो. मुमताज़ खान, मो. सोनू, मुस्कान खातून, साहिल अनवर, मो. सलीम, जलील खांन इत्यादि बताते हैं कि मुसलमानों के लिए रमजान का महीना अल्लाह की रहमत और बरकत का महीना होता है, जिसे संयम और समर्पण के साथ खुदा की इबादत का महीना माना गया है, जिसमें हर आदमी अपनी रूह को पवित्र करने के साथ अपनी दुनियादारी की हर हरकत को पूरी तत्परता के साथ वश में रखते हुए केवल अल्लाह की इबादत में समर्पित हो जाते है। रमजान के महीने में की गई खुदा की इबादत मुक्कमल होती है।
 वहीं जमुई जिले के निमारंग,  मौरा, धनियाठीका, नवादा, झाझा, इस्लामनगर आदि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में दर्स-ए-कुरान में उलमा कुरान की तिलावत के सही तरीके से लेकर कुरान के आयतों की तालीम दी जा रही  है।