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गिद्धौर के इस गांव में वर्षों से नहीं होता होलिका दहन, जानिए क्यों

न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा】 :-

गिद्धौर अंचल क्षेत्र में एक गांव ऐसा भी है जहां वर्षों से होलिका नहीं जलाई जाती। यह गांव रतनपुर पंचायत अंतर्गत बानाडीह है। यह वही बानाडीह गांव है जहाँ कुछ माह पूर्व सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने महत्वकांक्षी योजना जल-जीवन हरियाली के अवलोकन को आये थे। इस गांव में वर्षों से होलिका दहन नहीं होता। हां, लेकिन इसके अगले दिन बानाडीह के ग्रामीण पूरे हर्ष- उल्लास और रंग-गुलाल के साथ होली खेलते हैं।

गिद्धौर के इस बानाडीह गांव में होलिका दहन नहीं होने की परंपरा कब से है ये जानकारी तो नहीं जुट पाई, लेकिन स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि एक समय बानाडीह गांव में होलिका दहन के दौरान कोई संक्रमित बीमारी पूरे गांव को अपने चपेट में ले लिया था, पूरा बानाडीह उससे प्रभावित हुआ। पूरा बानाडीह तनावमय था। लोग सहमे थे।तभी से गांव वाले होलिका दहन नहीं करते। यहां से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रतनपुर गांव में यदि कोई होलिका दहन होती भी है तो इस गांव के कोई भी ग्रामीण वहाँ नहीं जाते। यहां तक कि बानाडीह के कई घरों में पुआ-पकवान बनाने का भी रिवाज़ नही है। पर, वहीं रंग-गुलाल व हर्षोल्लास के साथ लोग होली मनाते हैं।
विचारणीय योग्य बात यह है कि आज के युग मे जहां पहले के अपेक्षा शिक्षा के ग्राफ में बढ़ोतरी हुई है, वहां आज भी अंधविश्वास ने इस कदर अपना पांव पसार रखा है कि बानाडीह  के ग्रामीण होलिका दहन को लेकर कोई प्रयास भी करना रिवाज़ के प्रतिकूल मानते हैं।

(नोट :- क्षेत्र का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला पोर्टल gidhaur.com किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा नही देता। इस कंटेंट का उद्देश्य सिर्फ वास्तविकता से पाठकों को अवगत कराना है।)