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बानाडीह के खुशियों को लगा ग्रहण, CM के जाते ही उजड़ गया चमन

न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा】 :-


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन को लेकर कभी अधिकारियों की चहल कदमी से गूंजायमान रहने वाला बानाडीह आज अपनी खुशी को मोहताज़ हो गया है।

जी हाँ, गिद्धौर प्रखंड क्षेत्र के रतनपुर पंचायत का ये वही बानाडीह है, जहाँ बीते 10 जनवरी 2020 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने महत्वकांक्षी योजना जल-जीवन हरियाली का अवलोकन करने आये थे।
सीएम के आगमन पर अधिकारियों की चहलकदमी तेज थी, बानाडीह की सूरत निखर रही थी। जल-जीवन हरियाली योजना के तहत कार्य कराए जा रहे थे, तकरीबन 3 करोड़ के आधा दर्जन योजनाओं का शिलान्यास किया जा रहा था, ग्रामीणों का उत्साह चरम पर था, लेकिन किसे पता था ये चकाचौंध क्षणिक खुशी देगा। कुंवा धंसने लगा है, सड़क भी ध्वस्त होने के कगार पर है, पानी बन्द है, आहार की मिट्टी कटाव पर है। मनरेगा के तहत लगाए गए पौधों के जड़ पानी की आस में सिकुड़न अवस्था में जा रहा है, शिलापट्ट और छत को रातोरात उठा लिया गया।


 मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सरकारी महकमे के अधिकारी द्वारा जितनी तेजी से बानाडीह के कोसमा आहर के आस-पास सूरत निखरी थी, उतनी ही तेज गति से बिगड़ने लगी है। या फिर यूं कहें कि महज 4 दिन में ही ढाक के तीन पात वाली कहावत आज आमजन के सामने चरितार्थ होती दिख रही है।

इस संदर्भ में डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने कुआँ धंसने के प्रश्न पर बताया कि निर्माण स्थल पर नई मिट्टी है। इसके कारण स्ट्रक्चर धंसने की शिकायत आ सकती है। इसकी जवाबदेही संबंधित कार्य एजेंसी की है। मामले को देख लिया जाएगा।



हालांकि खबर है कि सीएम कार्यक्रम के अगले दिन ही इस आडम्बर का अनावरण हो चुका था और अनियमितता की नींव पर बने इन योजनाओं की वास्तविक तस्वीर उभरकर सामने आई।
अब सवाल ये उठता है कि जल-जीवन-हरियाली योजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर किये गए ये चकाचौंध सिर्फ सीएम को संतुष्ट करने के लिए था ? और अगर ये योजना सरकार द्वारा जनहित में लाई गई तो इसका लाभ लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रहा ?

- असंतुष्ट ग्रामीणों ने व्यक्त की तीखी प्रतिक्रियाएं -

इसी को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने इस पुरे क्रियाकलाप पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए असंतोष जाहिर किया है। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि सीएम अपने साथ बानाडीह की सारी खुशियां ले गए।

 छात्र मुन्ना कुमार ने बताया कि सीएम के आगमन पर हम लोगों में विकास की उम्मीद जगी थी। उलाय वियर से नियमित पानी मिलेगा, लेकिन सीएम के जाते ही पानी आना बंद हो गया। इससे किसान भी चिंतित हैं।


 ग्रामीण पप्पू यादव बताते हैं कि किसानों को सिचाई करने के दौरान रात गुजारने के लिए लकड़ी का झोपड़ी बनाया गया था, मुख्यमंत्री के जाने के बाद आधिकारिक धौंस दिखाते हुए इसे भी उखाड़ दिया गया।


 ग्रामीण राज कुमार कहते हैं कि बानाडीह में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सिर्फ दिखावा मात्र रहा। योजना के कार्यों में सिर्फ लूट हुई है। कार्यों के गुणवत्ता की जांच से सब सामने आ जाएगा।


 बुजुर्ग ग्रामीण विनोद पांडेय ने कहा कि बानाडीह में पहली बार मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर किसानों में खुशी देखी गई, पर अभी का सीन देखकर मन मायूस हो जाता है, वही है बात- चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात।



योजनाओं के नाम व प्राक्कलित राशि पर एक नजर 

1).

-लघु सिंचाई विभाग जमुई द्वारा निर्मित कोसमा आहर का जीर्णोद्धार कार्य   -  ₹1,36,16,757

2).

-लघु सिंचाई विभाग जमुई द्वारा निर्मित उलाई बीयर केनाल का जीर्णोद्धार कार्य  -  ₹1,48,10,000

3).

-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जलछाजन विकास के तहत सामुदायिक सिंचाई कूप का निर्माण कार्य   -  ₹3,90,900

4).

-मनरेगा अंतर्गत क्रियान्वयन उलाई बीयर बांध के किनारे दोनो तरफ वृक्षारोपण कार्य  -  ₹3,10,586

5).

-मनरेगा अंतर्गत क्रियान्वित प्राथमिक विद्यालय बानाडीह रतनपुर परिसर के चारो तरफ वृक्षारोपण कार्य  -  ₹3,10,586

6).

-मनरेगा अंतर्गत क्रियान्वित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय बानाडीह के प्रांगण में स्थित चापाकल के निकट सोख़्ता का निर्माण कार्य  -  ₹22,500

7).

-मनरेगा अंतर्गत उलाई बियर केनाल के किनारे स्थित कुंवा के नजदीक सोख़्ता का निर्माण  -  ₹14,000

8).

-ग्राम पंचायत रतनपुर के पंचायत निधि से क्रियान्वित गरभु स्थान से अभिनन्दन पंडित घर तक पेवर्स ब्लॉक का दो चरणों में निर्माण कार्य  - ₹11,73,900

9).

-ग्राम पंचायत रतनपुर के पंचायत निधि से गरभु स्थान का सौन्दर्यकरण कार्य  -  ₹9,45,200

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अब ऐसे व्यवस्था में भ्रष्टाचार के नाम पर जीरो टोलरेंस की बात करने वाले सरकार के महकमे की आस्तीन में ही अनियमितता की झलक दिखे तो करोड़ों की योजनाओं की आड़ में विकास का ये आडम्बर और तमाम सरकारी दावों को महज समझा जा सकता है।