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सेवा पंचायत भवन में कुव्यवस्था की सेंध, जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण उपेक्षित

[सेवा (गिद्धौर) | शुभम कुमार] :

कहते है न जब व्यवस्थाओं का देखभाल करने वाला महकमा ही सुप्तावस्था में हो तो फिर विकास की बात करना केवल एक छलावा मात्र है। 
कुछ ऐसी ही बानगी गिद्धौर प्रखण्ड के सेवा पंचायत भवन में देखने को मिली, जहाँ दिन के 12:00 बजे के बाद भी गेट पर लटकता ताला कुव्यवस्था की गवाही दे रहा था। गिद्धौर प्रखंड में  मुख्यमंत्री के संभावित आगमन के बाबजूद किसी भी जनप्रतिनिधियों का हरकत में न होना इनके कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है। 
गिद्धौर प्रखण्ड का सेवा पंचायत एक बहुत बड़े क्षेत्र को कवर करता है, जिसमें संसारपुर, केतरु नवादा के ग्रामीण 4-5 किमी की दूरी तय कर अपनी समस्या लेकर पंचायत भवन कार्यालय पहुँचते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों का कार्यालय में नदारद रहना इनकी परेशानियों का कारण बन रहा है।
वहीं अगर दूसरी ओर भवन के रख-रखाव और साफ-सफाई की बात करें तो इस मामले में काफी खामियां दिखती है। भवन के चारो तरफ की खिडकियों के शीशे टूट चुके हैं। साफ-सफाई की व्यवस्था नदारद है, गन्दगी ने पूरे भवन को अपने आग़ोश में ले लिया है।
ग्रामीण बताते हैं कि हमलोग मतदान कर इन्हें अपना जनप्रतिनिधि चुनते है ताकि ये हमारे गांव का विकास करें, लेकिन कोई भी प्रतिनिधि न तो सही समय पर कार्यालय पहुँचते है न ही हमारे समस्याओं के निदान में ये तत्परता दिखाते है, लिहाज़ा उनके क्रियाकलापों से हम ग्रामीण उपेक्षित हैं।

टेलीफोनिक टॉक से पता चला कि मुखिया जी किसी बैठक में भाग लेने गए हैं, पर अब यहां सवाल ये उठता है कि जब इस व्यवस्था के ज़िम्मेदार अपनी जिम्मेदारी पर औपचारिकतापूर्वक कार्रवाई करे तो अन्य से उम्मीद रखना भी व्यर्थ है।