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जमुई : 121वीं जयंती पर याद किये गए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कृष्णवल्लभ सहाय, लोगों ने अर्पित की पुष्पांजलि

जमुई :
स्थानीय कृष्णपट्टी मुहल्ले में स्थित निजी विद्यालय में मंगलवार को जमींदारी प्रथा के उन्मूलन अभियान के प्रणेता, जेपी आंदोलन के अमर सेनानी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कृष्ण वल्लभ सहाय जी की 121वीं जयंती पर जमुई के गणमान्य लोगों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई। संतोष सिन्हा ने सहाय जी के द्वारा समाज के प्रति किए गए कार्यो का स्मरण करते हुए कहा कि, "सहाय जी एक ऐसे राजनीतिक हस्ती रहे हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक समरसता कायम करने में लगा दिया।"
राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह (श्री बाबू) का कृष्ण वल्लभ सहाय जी पर अटूट विश्वास और स्नेह था। वे उन्हें प्यार से केबी कहकर पुकारते थे। श्री केबी सहाय जी की योग्यता को देखते हुए ही तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री बाबू ने उन्हें राजस्व मंत्री बनाया। बतौर राजस्व मंत्री श्री केबी सहाय जी ने समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास के लिए जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करने और भूमि सुधार कार्यक्रम प्रभावी रूप से लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए अनेक कार्यक्रम को लागू किया, जिसका लाभ आज समाज के इन वर्गों में विकास के रूप में देखने को मिल रहा है।
आज जिस योजना एवं विकास विभाग में राज्य की विकास योजनाओं का अनुमोदन होता है, यह केबी सहाय जी की सोच की देन है। दो अक्टूबर 1963 को बापू की जयंती के अवसर पर केबी सहाय जी ने बिहार के चौथे मुख्यमंत्री के  पद के रूप में शपथ ली थी। अपने पूरे कार्यकाल में श्री केबी सहाय जी ने सर्वांगीण विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाया। 1974 के जेपी आंदोलन में उन्होंने देश में परिवर्तन का अलख जगाया। आज श्री केबी सहाय जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके सामाजिक निर्माण के योगदान अविस्मरणीय रहेंगे। आज स्व. कृष्ण वल्लभ सहाय जी की जयंती पर युवाओं को यह प्रण लेना चाहिए कि वे हमारे पूर्व मुख्यमंत्री श्री सहाय जी के विचारों का अनुसरण करें।
इस कार्यक्रम में सूर्य प्रकाश सिन्हा, विवेक सिन्हा, अभय सिन्हा, संजय सिन्हा, राजेश सिन्हा, राजेंद्र यादव, नीरज साह, मिथिलेश कुमार, चंदन कुमार, मोहम्मद एजाज, भाई विश्वनाथ प्रकाश दास, नौशाद आलम,  नंदलाल मंडल,अभिषेक मांझी, संतोष सिन्हा, निरंजन यादव सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।

Edited by : Aprajita Sinha