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शनिवार, 23 नवंबर 2019

...तो, सिमुलतला आवासीय विद्यालय के शिक्षक अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे



सिमुलतला (गणेश कुमार सिंह) :-- 

बिहार शिक्षा का गौरव एवं मुख्यमंत्री मंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट व टॉपरों की फैक्ट्री के नाम से मशहूर सिमुलतला आवासीय विद्यालय के शिक्षकों को अपने पद पर बने रहने के लिए एक बार फिर नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। जबकि इन शिक्षकों की 2010 एवं 2012 में खुला विज्ञापन के तहत रोस्टर का पालन करते हुए 60 वर्षों के लिए हुई नियुक्ति हुई थी।


 इन्ही शिक्षकों के बल पर सिमुलतला विद्यालय टॉपरों की फैक्ट्री के नाम से मशहूर है हाल ही में इस विद्यालय को देश का सबसे बेहतर सरकारी विद्यालय होने का सम्मान भी प्राप्त हुआ है।  विगत 31 अगस्त को शिक्षा विभाग की कार्यकारिणी बोर्ड की एक बैठक में ही यह निर्णय लिया गया था लेकिन 22 नवम्बर को शिक्षा विभाग पटना द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया से सम्बंधित एक पत्र सिमुलतला आवासीय विद्यालय को प्राप्त हुआ है। शिक्षा विभाग ने फरमान जारी करते हुए सभी पदों पर बहाली का निर्णय लिया है, जिसे अमानवीय बतलाते हुए सभी शिक्षकों ने अदालत में जाने का निर्णय लिया है । विदित हो कि टॉपर्स की फैक्ट्री कहे जानेवाले सिमुलतला आवासीय विद्यालय की स्थापना 2010 में हुई थी जिसमें खुला विज्ञापन के अंतर्गत रोस्टर का पालन करते हुए साठ वर्षों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग द्वारा की गयी थी । दूसरी बार 2012 में भी इसी तरह शिक्षकों को बहाल किया गया । उनके नियुक्ति पत्र पर कालक्रम में सेवाशर्त देने की बात की बात की गयी है   । आठ - दस वर्षों की सेवा के बाद इस तरह पुनः सभी शिक्षकों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने की सूचना कार्यकारिणी बोर्ड की कार्यवाही प्रतिवेदन में उल्लेख करने से संपूर्ण शिक्षक समुदाय हतप्रभ है ।  शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के इस निर्णय पर दुख जतलाते हुए कहा कि शिक्षा विभाग का यह कदम अत्यंत ही अप्रत्याशित है । विद्यालय के प्रति शिक्षकों के समर्पण , निष्ठा और कठोर परिश्रम के बदले जो यह कदम उठाया गया है यह त्रासदी-पूर्ण है । शिक्षकों ने कहा कि अब हमलोग परीक्षा की तैयारी करें कि अध्यापन कार्य करें । इस तरह का निर्णय लेने वाले सभी अधिकारी अपना कार्य करते हुए नियुक्ति के दस वर्षों के बाद पुनः वही परीक्षा पास कर पाएंगे क्या?   शिक्षा विभाग का यह निर्णय पूर्व में लिए गए निर्णय के बिल्कुल विरुद्ध और अफसोसजनक है । प्राचार्य डा. राजीव रंजन ने कहा कि हम अब अदालत की शरण में जाने को बाध्य हैं । उपप्राचार्य व शैक्षणिक प्रमुख सुनील कुमार ने कहा कि-'सक्षम प्राधिकार के द्वारा विधिसम्मत चयन प्रक्रिया के द्वारा चयनित शिक्षकों की उत्कृष्ट सेवा के उपरांत शिक्षा विभाग द्वारा पुनः नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लेने को बाध्य करना अनैतिक , असंवैधानिक और अमानवीय है । हम सभी शिक्षक अनैतिकता के खिलाफ कदम से कदम मिलाकर विरोध करेंगे।

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