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मंगलवार, 24 सितंबर 2019

प्रतापनारायण मिश्र भारतेंदु मंडल के सबसे प्रमुख लेखक: डॉ. सुधांशु कुमार

सिमुलतला (गणेश कुमार सिंह) :-
कवि , पत्रकार , निबंधकार , व्यंग्यकार और नाटककार प्रतापनारायण मिश्र भारतेंदु हरिश्चंद्र के बाद 'भारतेंदु मंडल' के सबसे बड़े लेखक थे । उन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं पर अपनी लेखनी चलाई । प्रेम को ही सबसे बड़ा धर्म मानने वाले मिश्र जी ने सबसे पहले हिन्दी , हिंदू और हिंदुस्तान का नारा दिया ।

उक्त बातें सिमुलतला आवासीय विद्यालय में राम इकबाल सिंह राकेश साहित्य परिषद के तत्वावधान में प्रतापनारायण मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यंग्यकार डा. सुधांशु कुमार ने विषय प्रवेश के अंतर्गत कही । आगे उन्होंने बताया कि हिन्दी संसार प्रतापनारायण मिश्र का सदा ऋणी रहेगा । विद्यालय के प्राचार्य डा. राजीव  रंजन ने कहा कि प्रतापनारायण मिश्र की प्रतिभा और व्यक्तित्व के कारण उन्हें हिन्दी साहित्य का दूसरा भारतेंदु कहा जाता है । 'ब्राह्मण' पत्रिका के द्वारा उन्होंने सामाजिक बुराइयों पर जमकर प्रहार किया साथ ही हिंदी साहित्य को एक नयी दिशा भी दी । हिन्दी शिक्षिका कुमारी नीतू ने कहा कि प्रतापनारायण मिश्र गाय को सनातन संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ की हड्डी मानते थे । यही कारण है कि अपने महत्वपूर्ण नाटक 'गो रक्षा' में गाय की सुरक्षा पर बल दिया । इसके अलावा कलिकौतुक ,  जुआरी खुआरी ,संगीत शाकुन्तल , नवनीत , प्रताप पीयूष , प्रेम पुष्पावली , मन की लहर आदि महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं।
द्वितीय सत्र में आदर्श वाचन स्पर्धा आयोजित की गयी जिसमें प्रथम स्थान  सावन राज ने  द्वितीय स्थान प्रतिभा  एवं अमन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया । इसके अलावा अंकिता आनंद , हर्ष ,अमन , तनु , एवं तान्या ने बेहतर प्रदर्शन किया ।  इस अवसर पर ,  डा. जयंत कुमार , रंजय कुमार , प्रज्ञेश वाजपेयी , विनोद कुमार , राधाकांत मिश्र , विजय दुबे आदि शिक्षक भी मौजूद थे । स्वागत संबोधन शिक्षिका वर्षा कुमारी एवं धन्यवाद ज्ञापन सोनाली बसाक ने दिया ।

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