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महाकवि राकेश हिंदी के दधीचि, मानवता वाद का किया प्रवर्तन : डॉ. संजय पंकज

 सिमुलतला :- ( न्यूजडेस्क :– गणेश सिंह )

हमें सुसंस्कृत बनाता है । आज इसके प्रति उदासीनता का परिणाम ही है कि  मनुष्य मात्र यंत्र बनकर रह  गया है । संवेदना मर रही है । रिश्ते टूटे हुए कांच की तरह बिखर रहे हैं । साहित्य विहीन मनुष्य मात्र अर्थदस्यु बन जाने को ही अपने जीवन का लक्ष्य समझता है । यह आज के समाज , राष्ट्र और संपूर्ण मानवमात्र के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं । उक्त बातें मंगलवार को सिमुलतला आवासीय विद्यालय में महाकवि राम इकबालसिंह राकेश 'साहित्य परिषद की प्रथम वर्षगांठ पर आयोजित 'साहित्य और जीवन' विषय पर हुए व्याख्यान देते हुए प्रखर वक्ता , कवि साहित्यकार डा. संजय पंकज ने कही । आगे उन्होंने बताया कि महाकवि राकेश  हिन्दी काव्य में मानवतावाद के प्रवर्तक थे । वह हिंदी साहित्य के दधीचि थे । हिन्दी की समृद्धि में उनक बड़ा योगदान है । उन्होंने सबसे बड़ा धर्म पीड़ित मानवता की सेवा को बताया । कार्यक्रम में अतिथि वक्ता का स्वागत  उपप्राचार्य ने शाल ओढ़ाकर किया । अपने स्वागत संबोधन के क्रम में उपप्राचार्य सुनील कुमार ने राकेश साहित्य परिषद के एक वर्ष पूरा हो जाने पर परिषद के सदस्य शिक्षकों को साधुवाद देते हुए कहा कि इसके द्वारा आयोजित साहित्यिक -सांस्कृतिक आयोजन साहित्यिक-सांस्कृतिक चेतना को जाग्रत और विकसित करते हैं । साथ ही अपना बहुमूल्य समय निकालकर आने के लिए मंत्री , अखिल भारतीय साहित्य परिषद , प्रख्यात साहित्यकार डा. संजय पंकज को साधुवाद दिया । कार्यक्रम संचालन के क्रम में परिषद के संयोजक डा. सुधांशु कुमार ने कहा कि महाकवि राम इकबाल सिंह राकेश का विपुल साहित्य मानवता का संदेश देता है । तभी तो उन्होंने लिखा है कि -' पिघल उठे यदि अंतर मेरा/ उद्वेलित अनजान में / गंगा यमुना फूट बहे तब/ जग के रेगिस्तान में ।'
उन्होंने बताया कि साहित्य हमें विपरीत परिस्थितियों से जूझने की दृष्टि देता है और प्रख्यात साहित्यकार डा. संजय पंकज साहित्य-दृष्टि संपन्न विभूति हैं । इनका व्यक्तित्व और रचना संसार दोनो समृद्धि के नित नूतन आयाम गढ़ रहा है । ए महाकवि राम इकबाल सिंह राकेश की विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं ।

इसके साथ ही सीनियर छात्र छात्राओं के बीच श्रुतिलेख प्रतियोगिता आयोजित की गई , जिसमें प्रथम स्थान सुषमा द्वितीय आदित्य , गुड़िया , सोनल , एवं तृतीय स्थान आइना अमन और ज्योति ने प्राप्त किया । इसके अलावा सुमन , कैलास आर्यन ,स्वाति सिन्हा ,गुड़िया आदि ने बेहतर प्रदर्शन किया । इस अवसर पर  विजय कुमार , रंजय कुमार , डा. शिप्रा प्रभा , डा. प्रवीण कुमार सिन्हा , अनीता मिश्रा ,  जितेंद्र कुमार मिश्रा , विनोद कुमार यादव , प्रज्ञेश बाजपेयी , शशिकांत मिश्रा , अश्विनी कुमार आदि शिक्षक मौजूद थे । कार्यक्रम की शुरुआत में स्नेहवर्तिका ने महाकवि राम इकबालसिंह राकेश की कविता 'स्वतंत्र उड़ रहे विहग ' सुनाई । धन्यवाद ज्ञापन परिषद की समन्वयक डा. शिप्रा प्रभा ने दिया ।

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