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गिद्धौर : युवाओं के मिसाल बने सेवा के गोपी, हेल्थ मिनिस्टर ने दिया सम्मान

[न्यूज डेस्क | शुभम् /अभिषेक]

मंजिल पर पहुंचकर लिखूंगा मैं इन रास्तों की मुश्किलों का जिक्र, अभी तो आगे बढ़ने से ही फुरसत नहीं...

जमुई की धरती ने ऐसे कई रत्नों को जन्म दिया, जिसने उक्त पंक्तियों के तर्ज पर अपने मेहनत, लगन, और जूनून को आधार बनाते हुए समाज में अपना अस्तित्व कायम कर अमिट पहचान बनाते  हुए उपेक्षित लोगों को सामाजिक मुख्यधारा से जोड़कर इसमें एक नया बदलाव लाया है।
आपका अपना पाॅर्टल gidhaur.com आज आपको ऐसे ही एक रत्न से मुखातिब कराने जा रहा है क्योंकि गिद्धौर प्रखण्ड के सेवा पंचायत निवासी स्व. लालबहादुर सिंह के पुत्र गोपी कुमार की भी कुछ ऐसी ही दास्तां है, जो आज समाज के युवाओं के बीच मिसाल कायम कर रहे हैं।

पटना के अशोक होटल में 14 सितम्बर को आयोजित राज्य स्तरीय सिंपोजियम कार्यक्रम में बिहार सामुदायिक चैंपियन गोपी कुमार को परिवार नियोजन योजना के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के लिए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के द्वारा फैमिली प्लानिंग चैंपियन से सम्मानित किया गया। 

गिद्धौर प्रखंड के सेवा पंचायत निवासी गोपी कुमार की संघर्ष गाथा सातवीं कक्षा से शुरू होती है जब उनके पिता लाल बहादुर सिंह स्वर्गवासी हो गये और पालन-पोषण की जिम्मेदारी असहाय विधवा मां पर आ गई। सरकारी उपेक्षा से हिचकोले खाते पारिवारिक स्थिति के बीच धीरे- धीरे गोपी सामाजिक जिम्मेदारियों को भलिभांति समझने लगा। इसी दौरान वर्ष 2014 में गोपी कुमार ने एक स्थानीय एनजीओ से जुड़कर सामाजिक उत्थान के लिए इसमें रह रहे

जटिल समस्याओं व सामाजिक कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जमुई जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में घूम-घूम कर लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का सफल प्रयास किया। इसके अलावे, वर्तमान में गोपी द्वारा बाल संरक्षण, परिवार नियोजन, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, बाल विवाह, दहेज प्रथा सहित सामाजिक सरोकार से जुड़े कई जटिल मुद्दों पर आम आवाम को जागरुक कर उनके चेतना को जगाने का प्रयास जारी है।

इधर, परिवार नियोजन के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के लिए गोपी कुमार को सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय द्वारा सम्मानित किये जाने के इस उपलब्धि पर सेवा पंचायत एवं गिद्धौर प्रखंड के लोगों ने अपनी शुभकामनाएं दीं।  वहीं इस एचीवमेन्ट पर गोपी ने अपनी मां बेबी सिंह को गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया।

इतिहास गवाह है कि, इंसान खुद अपने मेहनत के बलबूते विषम परिस्थितियों और कठिनाइयों के मार्ग को प्रशस्त करते हुए कामयाबी की ओर बढ़ता है तो उसे समाज के लोगों का दर्द समझ आता है और उनकी यही सोच समाज सुधार के दिशा में एक नया बदलाव लाता है। गोपी के इस दास्तां ने इतिहास के इस गवाही पर गाढ़ी मुहर लगाई है।



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