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गिद्धौर क्वेरेंटिंन सेंटर में रसोइयों ने लगाए तन मन, नहीं मिला धन तो लगा रहे बाबूओं के चक्कर

Gidhaur News (अभिषेक कुमार झा) :-  कोरोना काल में बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूरों के लिए बनाए गए क्वारंटाइन सेंटरों में खाना बनाने के लिए प्रखंड क्षेत्र के चिन्हित विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों को जिम्मेदारी दी गई। क्वेरेंटिंन सेंटर बन्द होने के तकरीबन 15 दिन बीत जाने के बाद भी इन्हें रोजाना की 350 रुपये मजदूरी तक नहीं दी गई। इस मामले को लेकर अधिकारियों से फरियाद लगाने सोमवार को दर्जनों रसोइया एकत्रित  होकर गिद्धौर प्रखंड कार्यलाय परिसर पहुंची।




- आक्रोशित स्वर में बोले महिला रसोईया -

संवाददाताओं के पूछे जाने पर महिला रसोईया बताती हैं कि कोरोना के उस दौर में रसोइयों से हर समय क्षमता से अधिक काम  लिया गया। अब भुगतान में अधिकारी बैकफुट पर आ गये हैं। भुगतान न होने पर अब उन्हें लग रहा है कि तीन माह तक उनसे काम लेकर उनका शोषण किया गया है। कमली देवी, बुलबुल देवी, मैमून खातून, उषा देवी, दुलबा देवी, फ़तिमा खातून, हेमा देवी, मालती देवी, समेत दर्जनों महिला कर्मियों ने बताया कि 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान को लेकर जब वे इसकी फरियाद लेकर अंचलाधिकारी के पास जाते हैं तो सीओ इसका भुगतान एमडीएम प्रभारी के माध्यम से  होने की बात कहते हैं। गिद्धौर में एमडीएम प्रभारी की अनुपस्थिति के कारण जब महिला रसोइया ने एमडीएम प्रभारी आमिर दास से सम्पर्क करने की कोशिश करते हैं तो वो उनका फोन उठाना वाजिब नहीं समझते।

  - - - - कहते हैं अधिकारी - - - -

" योगदान देने वाली रसोइयों की हाजरी बनाकर विभाग को भेज दिया गया है। चिट्ठी के आधार पर राशि भुगतान करने के लिए अंचलाधिकारी अधिकृत हैं। "
    -  आमिर दास, एमडीएम प्रभारी, गिद्धौर

बता दें, प्रखण्ड कार्यालय गिद्धौर से 27/05/2020 को सीओ व बीडीओ के हस्ताक्षर में निर्गत ज्ञापांक 278 के माध्यम से भोजन व पानी कोषांग गठित कर दो पालियों में उ.म.वि. तथा प्रा.विद्यालय से चयनित 14 रसोईयो को नामित किया गया था। अब आलम यह कि अधिकारियों की टालमटोल से निम्नवर्गीय परिवार से आने वाले उक्त दर्जनों महिला रसोइया की आर्थिक स्थिति चर्माराने लगी है। रसोईयों ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि यदि इन अधिकारियों ने टालमटोल वाली हरकत को त्याग राशि भुगतान नहीं किया तो जिले के वरीय अधिकारियों के समक्ष प्रदर्शन को विवश हो जाएंगे।

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