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देशवासियों को परिवार के सदस्य की तरह देखने से सौहार्द्र बढ़ेगा : प्रो. आनन्द कुमार

पटना : अमन समिति द्वारा "सामाजिक सौहार्द्र की चुनौतियां" विषय पर मंगलवार को आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए गांधीवादी नेता प्रोफेसर आनन्द कुमार ने कहा कि देश को परिवार एवं देशवासियों को परिवार के सदस्य के रूप में देखने की समझ विकसित करने की जरूरत है। इससे सामाजिक सौहार्द्र के स्तर में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं समुचित ज्ञान द्वारा ही ऐसी समझ को विकसित किया जा सकता है। संवाद से वैमनस्य को कम किया जा सकता है। मैत्री एवं भाईचारे के भाव से क्रोध पर लगाम लगाया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि पत्रकार शेष नारायण सिंह ने कहा कि हिंसा की प्रतिक्रिया हिंसा से देने से हिंसा बढ़ती है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय की चर्चा करते हुए बताया कि उस समय ट्रेनों से लोग पाकिस्तान से भारत आ रहे थे, और भारत से पाकिस्तान भी जा रहे थे। पाकिस्तान से एक ट्रेन ऐसी आई, जिसमें सारे लोग मार दिये गए थे। तब सरदार बल्लभ भाई पटेल को यह इंटेलिजेंस रिपोर्ट मिल चुकी थी कि भारत में भी जन-आक्रोश इतना ज्यादा है कि इस बार भारत से जो ट्रेन पाकिस्तान जा रही है, उसमें भी कोई जिंदा नहीं जा पायेगा। तब सरदार पटेल ने हिन्दुओं और सिक्खों के साथ कई बैठकें की, और लोगों को समझाया कि हिन्दू और सिक्ख होने का मतलब दूसरों की रक्षा करना है, जान लेना नहीं। लोगों को समझाने के बाद सरदार पटेल ने पाकिस्तान जा रही ट्रेन के साथ सिक्खों के जत्थों को भी अटारी बॉर्डर तक भेजा, ताकि पाकिस्तान जाने वाले लोग सुरक्षित पाकिस्तान तक पहुंचे। उसके बाद से जितनी ट्रेनें पाकिस्तान से भारत आईं, एवं भारत से पाकिस्तान गईं, सभी यात्री सुरक्षित रहे। श्री सिंह ने कहा कि हिंसा को अहिंसा की प्रतिक्रिया द्वारा नियंत्रित करना सहज है।
मौके पर उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक राहुल देव ने संवाद को सामाजिक सौहार्द्र मजबूत करने का रास्ता बताते हुए कहा कि जब हिन्दू और मुस्लिम एक साथ बैठकर अपनी मुश्किलों एवं दूसरे की कमियों को आमने-सामने सहजता से बोलने की स्थिति में आ जायेंगे, तभी उनके बीच की खाइयों को पाटा जा सकेगा। उन्होंने महात्मा गांधी की चर्चा करते हुए बताया कि गांधी जी में जो विचार आते थे, उसे भी वे सार्वजनिक स्तर पर बोल दिया करते थे, किन्तु आज बंद कमरों में बैठकर लोग ऐसे-ऐसे षडयंत्र कर रहे हैं कि उसे भी सार्वजनिक तौर पर सार्वजनिक स्तर पर बोल पाना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि लोगों को उतना तक ही कार्य करना चाहिए जिसे सार्वजनिक स्तर पर भी बोला जा सके। सार्वजनिक स्तर पर न बोला जाने योग्य षडयंत्रों से बचना चाहिए।
पत्रकार आलोक जोशी ने कहा कि आर्थिक मंदी भी सामाजिक सौहार्द्र को कम करने में एक महत्वपूर्ण कारक है। समृद्धि को सौहार्द्र का रास्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि जब जिस समाज की आर्थिक संपन्नता जितनी अधिक होगी, सामाजिक सौहार्द्र का स्तर उतना अधिक होगा। गरीबी के झगड़े के स्तर का बढ़ जाना स्वाभाविक है।
मौके पर अमन समिति के संयोजक धनंजय कुमार सिन्हा, समाजसेवी अंजुम बारी, चौधरी ब्रह्मप्रकाश यादव, मुश्ताक राहत, हरेंद्र कुमार एवं तकनीकी छात्र संगठन के अध्यक्ष सौरव कुमार पटेल ने भी अपने विचार रखे।
टेक्नो हेराल्ड के निदेशक अभिषेक कुमार सिन्हा ने वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। अमन समिति के प्रचारक विकास आनन्द ने पत्रकार आलोक जोशी को एवं सौरव कुमार पटेल ने पत्रकार शेष नारायण सिंह को पुष्पगुच्छ देकर अभिनन्दन किया।
इस अवसर पर शहजाद अहमद खान, अश्वनी शर्मा, नौशाद अली, रश्मि भट्ट, विजय शर्मा, कृष्ण मुरारी प्रसाद, वरिष्ठ पत्रकार देवप्रकश, प्रियंका कुमारी, अभिनव शेखर, विजय शर्मा, आसमा खान, छात्र नेता हिमांशु कुमार, निशांत तिवारी, अमित कुमार सिंह, चंदन कुमार सहित दर्जनों युवा समाजसेवी मौजूद थे।