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पर्यावरण प्रेम को दर्शाती शुभांगना की कविता - फूलों की खुशबू



[कविता | शुभंगना गौरव]
(Edited by - Guddu Burnwal) :

यह कविता उन हिंदी प्रेमी पाठको के लिए है जिनको पर्यावरण से या यूं कहे पेड़-पौधों में ज्यादा रुचि है। आज भाग दौड़ की इस दुनियां में लोग पर्यावरण से दूरियां बढ़ा रहे है। ऐसे में नन्ही सी शुभांगना ने एक कविता प्रस्तुत की है।

।।फूलों की खुशबू।।

फूलों की खुशबू कितनी सुहानी
सबके मन को लुभाने वाली
दिल में सबके आनंद भर दे
मन में सबके उमंग भर दे।।

रंग बिरंगे फूल हैं होते
मन में खुशियां भर देते
देख के इसको जी ललचाए
काश!हम इनके जैसे बन पाए।।

सबके चेहरे पर मुस्कान हैं लाते
खुशियों की बौछार हैं लाते
जीवन में उमंग की लहर दौड़ जाती
खुशियां ही खुशियां भर जाती।।

फूल अपने प्राण न्यौछावर करते
मूर्ति और मालाओं में सज जाया करते
इनकी सुंदरता महान है
अच्छाई की एक शान है।।