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रतनपुर : सरकारी चापाकल पानी उगलने में असमर्थ, प्रतिनिधि नहीं देते ध्यान

न्यूज़ डेस्क | भीम राज / अभिषेक कुमार झा】:-

सरकारी स्तर पर स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए भले ही कई प्रयास किये जा रहे हों, लेकिन
गिद्धौर प्रखंड के कुछ हिस्सों में लगे सरकारी चापाकल खुद प्यासे खड़े हैं। लिहाज़ा सैकड़ों लोग पानी के लिए तरसना पड़ रहा हैं।

ग्रामीणों के इस समस्या को मद्देनजर रखते हुए इसकी पड़ताल करने gidhaur.com की टीम बुधवार को गिद्धौर प्रखंड के रतनपुर पंचायत अंतर्गत विभिन्न वार्ड में पहुंचे और ग्रामीणों से उनकी समस्याओं को सुना।
पेयजल संकट पर अपनी चिंता प्रकट करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि बैशाख महीने की प्रचंड गर्मी मे रतनपुर पंचायत के अधिकांश नदी, पोखर, चापाकल आदि सूख चुके हैं। पानी का जलस्तर नीचे चले जाने कारण अधिकांश चापाकल भी जवाब देने लगे हैं। ऐसे में महीनों से खराब पड़े सरकारी चापाकल की मरम्मत नहीं होने से लोगों को प्यास बुझाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। 
विभागीय आदेश के बाद भी सुस्त पड़े इन सरकारी चापाकलों की हालत को देखकर के ग्रामीण सरकारी अधिकारियों को कोसते नजर आते हैं।

 इस दौरान gidhaur.com की टीम ने अपने पड़ताल में पाया कि पीएचडी विभाग के साथ विधायक एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा गाड़े गए आधा दर्जन से भी अधिक चापाकल खराब पड़े हैं।  जबकि पंचायत में वार्ड नंबर 2 संजय साह के घर के समीप लगे चापाकल, वार्ड नंबर 3 हरी साह घर के समीप लगे चापाकल, वार्ड नंबर 6 मनीष झा आवास स्थान के समीप लगे चापाकल एवं वार्ड नंबर 7 बानाडीह स्थित जीतेंद्र राम के घर के समीप लगे चापाकल कई महीनों से पानी उगलने में विफल साबित हो रहे हैं। 

 इधर, गिद्धौर प्रखंड क्षेत्र के भौराटांड़ मुसहरी में कुल तीन सरकारी चापाकल घनी आबादी वाले ग्रामीणों की प्यास बुझाने को असमर्थ है।
वहीं इस समस्या को लेकर गिद्धौर के प्रखंड विकास पदाधिकारी चिरंजीव पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीणों को होने वाले पेयजल की समस्या से विभाग को अवगत कराया जाएगा।
इधर ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी गयी है बावजूद इसके आजतक संतुष्टिजनक आउटकम नहीं आ सका है। यदि शीघ्र ही इन चापाकलों को उपयोग लायक नहीं बनाया गया तो हमलोग विभागीय पदाधिकारियों का दरवाजा खटखटाएंगे।