गिद्धौर के दुर्गा-लक्ष्मी पूजा और मेला के आयोजन में तीन दशकों से योगदान देने वाले सम्मानित - gidhaur.com : Gidhaur - गिद्धौर - Gidhaur News - Bihar - Jamui - जमुई - Jamui Samachar - जमुई समाचार

Breaking

Responsive Advertisement

Responsive Advertisement

Responsive Advertisement

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

गिद्धौर के दुर्गा-लक्ष्मी पूजा और मेला के आयोजन में तीन दशकों से योगदान देने वाले सम्मानित

  • परिवहन मंत्री दामोदर रावत, खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह और मुखिया ललिता देवी ने किया मेले का उद्घाटन
  • राजपरिवार की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा है गिद्धौर का दुर्गा पूजा मेला

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार : ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के लिए विख्यात गिद्धौर में शारदीय दुर्गा पूजा एवं लक्ष्मी पूजा मेले का सोमवार की देर शाम विधिवत शुभारंभ किया गया। बिहार सरकार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत, बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह तथा पतसंडा पंचायत की मुखिया सह शारदीय दुर्गा पूजा एवं लक्ष्मी पूजा समिति की अध्यक्ष ललिता देवी ने संयुक्त रूप से मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति रही।
गिद्धौर की ऐतिहासिक पहचान और मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से जुड़े इस मेले का स्थानीय लोगों को हर वर्ष बेसब्री से इंतजार रहता है। पूजा-अर्चना के साथ मेले की शुरुआत ने पूरे क्षेत्र में उत्सवी माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया। उद्घाटन समारोह के दौरान आयोजन की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले लोगों के योगदान को याद करते हुए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
ऐतिहासिक गिद्धौर राज रियासत की विरासत से जुड़ा है दुर्गा पूजा मेला
गिद्धौर की धरती का इतिहास ऐतिहासिक गिद्धौर राज रियासत की गौरवशाली विरासत से जुड़ा रहा है। यह क्षेत्र सदियों से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक समृद्धि और ऐतिहासिक परंपराओं का केंद्र रहा है। यहां मां दुर्गा के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा और विश्वास इस क्षेत्र की विशिष्ट पहचान है। शारदीय दुर्गा पूजा एवं लक्ष्मी पूजा का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गिद्धौर की सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक सहभागिता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का भी प्रतीक है।
पूर्व में गिद्धौर राजपरिवार की ओर से दुर्गा पूजा और मेले का आयोजन किया जाता था। इसके बाद वर्ष 1996 में गिद्धौर राज रियासत के तत्कालीन महाराज बहादुर प्रताप सिंह ने पूजा एवं मेले के आयोजन को जनाश्रित घोषित करते हुए इसकी जिम्मेदारी स्थानीय ग्रामीणों को सौंप दी। इसके साथ ही इस धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन में जनभागीदारी की एक नई परंपरा स्थापित हुई।

तब से स्थानीय ग्रामीणों और पूजा समिति के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन निरंतर आगे बढ़ रहा है। समय के साथ समिति और ग्रामीणों की सहभागिता ने इस परंपरा को कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गिद्धौर का यह मेला आज भी स्थानीय लोगों के लिए आस्था, परंपरा और सामाजिक मेल-मिलाप का महत्वपूर्ण अवसर बना हुआ है।
आयोजन के तीसवें वर्ष पर पुराने सहयोगियों को मिला सम्मान
इस वर्ष पूजा एवं मेला आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही समिति के तीसवें वर्ष के अवसर पर लंबे समय से आयोजन में अपना योगदान देने वाले लोगों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान बिहार सरकार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत, खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह तथा समिति की अध्यक्ष ललिता देवी ने स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र प्रदान कर आयोजन से जुड़े सहयोगियों के योगदान को सम्मान दिया।

सम्मान समारोह के माध्यम से उन लोगों की भूमिका को रेखांकित किया गया, जिन्होंने वर्षों से पूजा और मेले की परंपरा को बनाए रखने में अपना समय, श्रम और सहयोग दिया है। धार्मिक आयोजनों की निरंतरता में ऐसे लोगों का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर सामूहिक प्रयासों से ही ऐतिहासिक परंपराएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती हैं।
समिति की ओर से सम्मानित किए गए लोगों में शामिल रहे -
1. नरेश रावत उर्फ नागो मंडल
2. अश्विनी सिंह
3. नरेश सिंह
4. वासुदेव शर्मा
5. रघुवीर राम
6. शंभू यादव
7. मथुरा मिस्त्री
8. बमबम सिंह
9. विकास रंजन
10. मूर्तिकार राजकुमार रावत
11. राजेश कुमार उर्फ पाजो जी
12. अजीत कुमार
इन सभी को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में आयोजन से लंबे समय से जुड़े सहयोगियों के साथ मूर्तिकार राजकुमार रावत भी शामिल रहे, जिनका नाम समिति की ओर से सम्मानित व्यक्तियों की सूची में रखा गया।

मुख्य अतिथियों को भी समिति ने किया सम्मानित
मेले के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथियों का भी सम्मान किया गया। शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति की ओर से बिहार सरकार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत को समिति के सचिव सुबोध कुमार सिंह ने सम्मानित किया। वहीं, बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह को समिति की अध्यक्ष एवं पतसंडा पंचायत की मुखिया ललिता देवी ने सम्मान प्रदान किया।
इस दौरान समिति की ओर से अतिथियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। समारोह में उपस्थित लोगों के बीच आयोजन की ऐतिहासिक परंपरा और इसे सामूहिक सहभागिता से आगे बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
समिति के प्रमुख पदाधिकारियों को भी किया गया सम्मानित
इस अवसर पर शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति के प्रमुख पदाधिकारियों को भी उनके योगदान और आयोजन की जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए सम्मानित किया गया। समिति की अध्यक्ष एवं पतसंडा पंचायत की मुखिया ललिता देवी, कार्यकारी अध्यक्ष राजीव कुमार साव उर्फ पिंकू जी, सचिव सुबोध कुमार सिंह उर्फ काजू जी तथा कोषाध्यक्ष सुबोध कुमार केशरी को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समिति के इन पदाधिकारियों की भूमिका पूजा एवं मेले के आयोजन, प्रबंधन और इसकी ऐतिहासिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही है। इस सम्मान के माध्यम से आयोजन को सफल बनाने में उनके योगदान और सामूहिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया गया।
समिति के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
उद्घाटन समारोह में शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति की अध्यक्ष एवं पतसंडा पंचायत की मुखिया ललिता देवी, कार्यकारी अध्यक्ष राजीव कुमार साव उर्फ पिंकू जी, सचिव सुबोध कुमार सिंह उर्फ काजू जी, कोषाध्यक्ष सुबोध कुमार केशरी, उपाध्यक्ष अजीत कुमार उर्फ कारू जी, उप सचिव राजेश कुमार उर्फ पाजो जी तथा प्रभाकर कुमार उर्फ चिंटू जी सहित समिति के अन्य पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त गिद्धौर के प्रखंड विकास पदाधिकारी ई. सुनील कुमार, जदयू नेता जयनंदन सिंह, शैलेन्द्र रावत और गुंजन कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, समिति के सदस्यों और ग्रामीणों की सहभागिता ने आयोजन के सामुदायिक स्वरूप को प्रदर्शित किया। सभी की उपस्थिति के बीच मेले का उद्घाटन संपन्न हुआ और गिद्धौर की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के संकल्प का संदेश सामने आया।
आस्था, परंपरा और जनभागीदारी का प्रतीक है गिद्धौर का मेला
गिद्धौर का शारदीय दुर्गा पूजा एवं लक्ष्मी पूजा मेला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजपरिवार से शुरू हुई आयोजन की परंपरा का ग्रामीणों और समिति के माध्यम से निरंतर जारी रहना जनभागीदारी की एक उल्लेखनीय मिसाल है।

वर्ष 1996 में आयोजन की जिम्मेदारी स्थानीय ग्रामीणों को सौंपे जाने के बाद से समिति द्वारा इसे लगातार आयोजित किया जा रहा है। आयोजन के तीसवें वर्ष पर पुराने सहयोगियों को सम्मानित करना इस बात को रेखांकित करता है कि किसी भी ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखने में सामूहिक सहयोग, समर्पण और निरंतरता की अहम भूमिका होती है।
सोमवार की देर शाम हुए उद्घाटन के साथ गिद्धौर में शारदीय दुर्गा पूजा एवं लक्ष्मी पूजा मेले की शुरुआत हुई। ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता से जुड़ा यह आयोजन एक बार फिर गिद्धौर की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का अवसर बना।

Responsive Advertisement