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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

गिद्धौर की ऐतिहासिक दुर्गा-लक्ष्मी पूजा को भव्य बनाने की तैयारी तेज, डॉ. एन.डी. मिश्रा ने दिया सहयोग

  • देवघर पहुंची पूजा समिति की टीम, जनसंपर्क अभियान के जरिए जुटाया जा रहा जनसहयोग
  • धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को भव्य स्वरूप देने में जुटे पदाधिकारी

गिद्धौर/जमुई। गिद्धौर की ऐतिहासिक शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा को भव्य, आकर्षक और व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने के लिए पूजा समिति का जनसंपर्क अभियान तेज हो गया है। इसी कड़ी में गुरुवार को पूजा समिति के पदाधिकारियों ने झारखंड के देवघर पहुंचकर बिहार-झारखंड के सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं गिद्धौर निवासी डॉ. नीलेंदु दत्त मिश्रा (डॉ. एन.डी. मिश्रा) से मुलाकात की। इस दौरान समिति के सदस्यों ने उन्हें पूजा आयोजन की तैयारियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा उनसे सहयोग राशि प्राप्त की।

जनसहयोग से भव्य होगा ऐतिहासिक आयोजन
पूजा समिति का उद्देश्य प्रबुद्ध नागरिकों, व्यवसायियों, समाजसेवियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों की सहभागिता से गिद्धौर के पारंपरिक धार्मिक आयोजन को और अधिक भव्य बनाना है। इसके लिए समिति के पदाधिकारी लगातार विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और लोगों से जनसहयोग की अपील कर रहे हैं। समिति का मानना है कि सामूहिक सहभागिता से न केवल पूजा आयोजन को बेहतर बनाया जा सकता है, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित और प्रोत्साहित किया जा सकता है।

देवघर में आयोजित जनसंपर्क अभियान के दौरान समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजीव कुमार साव उर्फ पिंकू, सचिव सुबोध कुमार सिंह उर्फ काजू, कोषाध्यक्ष सुबोध कुमार केशरी, उपसचिव राजेश कुमार उर्फ पाजो जी तथा राजीव रंजन उर्फ पाटली उपस्थित रहे। समिति के पदाधिकारियों ने डॉ. मिश्रा से मुलाकात कर आयोजन में सहयोग देने के लिए आभार व्यक्त किया।

चंदेल राजाओं के समय से जुड़ी है पूजा की परंपरा
गिद्धौर की शारदीय दुर्गा पूजा अपनी ऐतिहासिक परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखती है। नागी, नकटी और उलाई नदियों के संगम तट पर स्थित मां दुर्गा के मंदिर में चंदेल राजाओं के समय से जुड़ी परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना किए जाने की मान्यता रही है। यही वजह है कि इस आयोजन का स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में भी विशेष महत्व है।

प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गिद्धौर पहुंचते हैं और मां दुर्गा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मेला भी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहता है, जहां क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की झलक देखने को मिलती है।

दुर्गा पूजा के साथ शरद पूर्णिमा पर होगी महालक्ष्मी पूजा
शारदीय दुर्गा पूजा के अलावा शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां महालक्ष्मी की पूजा और भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है। इसे लेकर समिति के सदस्य तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में सक्रिय हैं। आयोजन को सफल बनाने के लिए गिद्धौर और आसपास के गांवों के साथ-साथ जमुई में भी सहयोग राशि संग्रह करने का अभियान चलाया जा रहा है।

समिति का प्रयास है कि श्रद्धालुओं की सुविधा, धार्मिक कार्यक्रमों की भव्यता और मेले की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आयोजन को बेहतर बनाया जाए। इसके लिए जनसहयोग को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

गणमान्य लोगों से संपर्क कर जुटाया जा रहा सहयोग
पूजा समिति के पदाधिकारी क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिकों, समाजसेवियों और सहयोगकर्ताओं से लगातार संपर्क कर रहे हैं। समिति को उम्मीद है कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी से इस ऐतिहासिक आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकेगा। डॉ. एन.डी. मिश्रा से प्राप्त सहयोग को भी आयोजन की तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समिति ने जनसहभागिता के माध्यम से गिद्धौर की धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने और दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा को श्रद्धालुओं के लिए यादगार बनाने की दिशा में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में जनसंपर्क अभियान के और तेज होने की संभावना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पारंपरिक आयोजन से जुड़ सकें और सामूहिक सहयोग से इसे भव्य रूप दिया जा सके।

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