- इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और ट्रेकिंग को मिलेगा बढ़ावा
- परासी पठार को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ने की योजना
जमुई/बिहार। गिद्धेश्वर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी ने वन प्रमंडल पदाधिकारी, जमुई एवं उप विकास आयुक्त सहित संबंधित पदाधिकारियों के साथ गिद्धेश्वर क्षेत्र का स्थलीय भ्रमण कर पर्यटन विकास की संभावनाओं का जायजा लिया। इस दौरान क्षेत्र की भौगोलिक संरचना, पहाड़ी दृश्य, हरित परिवेश, जलस्रोतों और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व के साथ पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर चर्चा की गई।
इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म पर जोर
जिला प्रशासन की योजना गिद्धेश्वर को केवल धार्मिक अथवा प्राकृतिक स्थल के रूप में विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र पर्यटन गंतव्य के रूप में पहचान दिलाने की है। इसके तहत इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, प्रकृति भ्रमण और ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यू-प्वाइंट, पहुंच मार्ग, विश्राम स्थल और सूचना केंद्र जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी विचार किया जा रहा है।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान संबंधित पदाधिकारियों ने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप पर्यटन योजनाओं को व्यावहारिक स्वरूप देने पर विमर्श किया। उद्देश्य है कि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों का विस्तार किया जा सके।
परासी पठार को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी
भ्रमण के दौरान जिला पदाधिकारी ने परासी पठार का भी निरीक्षण किया। यहां की भौगोलिक विशेषताओं, आसपास की पहाड़ियों, हरियाली और प्राकृतिक विस्तार को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया गया। परासी पठार को गिद्धेश्वर के व्यापक पर्यटन सर्किट से जोड़ने के विकल्पों पर भी संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा की गई।
प्रशासन का प्रयास है कि गिद्धेश्वर आने वाले पर्यटकों को आसपास के अन्य प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण करने का अवसर मिले। इससे क्षेत्र में पर्यटकों के ठहराव और भ्रमण की संभावनाएं बढ़ने के साथ स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
प्राकृतिक विरासत और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण पर बल
गिद्धेश्वर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक आस्था, लोकविश्वास और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। यहां के पहाड़, वन क्षेत्र, जलस्रोत और ग्रामीण परिवेश इसकी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में पर्यटन विकास की योजना तैयार करते समय इन विशेषताओं के संरक्षण तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
पर्यटन को स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, ताकि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुई कवायद
गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के चकाई भ्रमण के दौरान गिद्धेश्वर क्षेत्र के विकास से संबंधित आवश्यक प्रस्ताव एक माह के भीतर तैयार कर भेजने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने क्षेत्र की वास्तविक भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक विशेषताओं और पर्यटन की संभावनाओं का आकलन करने की दिशा में पहल तेज की है। जिला पदाधिकारी का स्थलीय भ्रमण इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पर्यटन के साथ रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगी गति
जिला प्रशासन की प्रस्तावित योजना में पर्यावरण संरक्षण, पर्यटकों की सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं के विकास, धार्मिक आस्था की गरिमा और स्थानीय संस्कृति को प्राथमिकता देने पर जोर है। साथ ही, पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
प्रस्तावित योजनाओं को मंजूरी मिलने और धरातल पर लागू किए जाने के बाद गिद्धेश्वर तथा आसपास के प्राकृतिक स्थलों को व्यवस्थित पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इससे जमुई जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

