गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 5 सितंबर 2026, शनिवार : प्रखंड अंतर्गत पतसंडा पंचायत के वार्ड संख्या-5, रोड नंबर-2 स्थित एक निजी मकान में संचालित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केंद्र में शुक्रवार की संध्या श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान केंद्र परिसर में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी विभिन्न लीलाओं का मनमोहक मंचन किया।
कार्यक्रम में बच्चों ने श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी बाल लीलाओं तथा राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम को सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से प्रदर्शित किया। बच्चों की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर केंद्र की मुख्य प्रशासिका ब्रह्माकुमारी राज राजेश्वरी सरिता दीदी ने श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक स्वरूप और उनके जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म विश्व कल्याण के लिए हुआ था। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण को 16 कला संपूर्ण माना गया है तथा उन्हें द्वापर का प्रथम राजकुमार बताया जाता है। वहीं, राधा को द्वापर की राजकुमारी कहा गया है।
उन्होंने राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक संबंध की व्याख्या करते हुए कहा कि राधा का भाव ईश्वर के प्रेम से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, ईश्वर के प्रेम के बिना मनुष्य का जीवन आध्यात्मिक रूप से अधूरा रहता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से श्रीकृष्ण के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर जीवन में प्रेम, शांति, पवित्रता एवं सद्भाव को अपनाने का आह्वान किया।
जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनकी शिक्षाओं पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया तथा आयोजन की सराहना की। मौके पर स्थानीय ग्रामीणों सहित केंद्र से जुड़े श्रद्धालु एवं अन्य लोग उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रीकृष्ण के जयकारों से परिसर गुंजायमान होता रहा।







