- जिला पदाधिकारी के निर्देश पर सरस्वती विद्या निकेतन का गहन निरीक्षण
- पुस्तकालय से लेकर शौचालय और उद्यान तक की व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा
जमुई/बिहार (Jamui/Bihar), 5 सितंबर 2026, शनिवार : जिले में विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर विद्यालयों की निगरानी और समीक्षा जारी है। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी के निर्देशानुसार अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय), सतायन, जमुई का गहन निरीक्षण एवं समीक्षा की गई।
निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी ने विद्यालय की शैक्षणिक एवं आधारभूत व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं संबंधित शिक्षकों के साथ बैठक कर पठन-पाठन की वर्तमान स्थिति, विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, शिक्षण व्यवस्था तथा परीक्षा परिणाम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली।
कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से किया सीधा संवाद
विद्यालय निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी ने औपचारिक समीक्षा तक सीमित रहने के बजाय स्वयं कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, विषयों की समझ और कक्षा में होने वाले शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया के बारे में बातचीत की।
इस दौरान विद्यार्थियों से प्रश्न पूछकर उनके विषयगत ज्ञान एवं समझ का भी आकलन किया गया। प्रशासनिक अधिकारी को अपने बीच शिक्षक की भूमिका में देखकर विद्यार्थियों में भी उत्साह देखने को मिला।
10वीं के छात्रों को पढ़ाया भूगोल का ‘संसाधन’ अध्याय
निरीक्षण के क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी ने कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों को भूगोल विषय के ‘संसाधन’ अध्याय का अध्यापन कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को विषय की अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया और पढ़ाई को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रखते हुए विषय को समझकर सीखने पर जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, विषयों की बेहतर समझ और परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय में बेहतर प्रदर्शन के लिए केवल याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके मूल तथ्यों और अवधारणाओं को समझना जरूरी है।
9वीं कक्षा में ‘संविधान’ की पढ़ाई
इसी क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी ने कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों को राजनीति विज्ञान विषय के ‘संविधान’ अध्याय की भी पढ़ाई कराई। विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक तरीके से विषय को समझाते हुए उन्होंने उनसे प्रश्न पूछे और उनके उत्तर सुने।
इस दौरान विद्यार्थियों को संविधान के महत्व तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी भूमिका को समझने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने छात्रों से कहा कि पाठ्यपुस्तक में दिए गए विषयों को गंभीरता से समझें और अपने आसपास की सामाजिक एवं लोकतांत्रिक गतिविधियों से जोड़कर सीखने का प्रयास करें।
पुस्तकालय और अन्य सुविधाओं का लिया जायजा
विद्यालय के निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी ने पुस्तकालय, शौचालय, उद्यान एवं विद्यालय परिसर में उपलब्ध अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने यह देखा कि विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं तथा विद्यालय परिसर का वातावरण बच्चों के लिए अनुकूल एवं स्वच्छ है या नहीं।
पुस्तकालय की उपयोगिता पर जोर देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों में नियमित पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और ज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विद्यालय परिसर की साफ-सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए उन्होंने संबंधित लोगों को परिसर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए।
बेहतर परीक्षा परिणाम पर विशेष जोर
समीक्षा के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी ने विद्यालय के शिक्षकों के साथ शैक्षणिक प्रदर्शन और परीक्षा परिणाम को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतर परिणाम के लिए नियमित मूल्यांकन, कमजोर विद्यार्थियों की पहचान और उनके लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग जरूरी है।
उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की व्यक्तिगत शैक्षणिक जरूरतों को समझते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। साथ ही विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और परिणामों में निरंतर सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
संवादपूर्ण शिक्षण को बढ़ावा देने का निर्देश
अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि प्रभावी शिक्षा के लिए शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बेहतर संवाद बेहद आवश्यक है। कक्षा में विद्यार्थियों को सवाल पूछने, अपनी जिज्ञासा व्यक्त करने और विषय को लेकर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे शिक्षण प्रक्रिया को अधिक संवादपूर्ण, सरल और विद्यार्थीकेंद्रित बनाने का प्रयास करें, ताकि छात्र केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि विषय की वास्तविक समझ विकसित करने के उद्देश्य से पढ़ाई करें।
प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
निरीक्षण के अंत में अनुमंडल पदाधिकारी ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने, नियमित पठन-पाठन, विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निरंतर निगरानी, विद्यालय परिसर की साफ-सफाई तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई कराने का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का केंद्र है। इसलिए शैक्षणिक गतिविधियों के साथ स्वच्छ वातावरण, अनुशासन, पुस्तकालय का उपयोग और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
जिला प्रशासन की ओर से विद्यालयों के इस प्रकार के निरीक्षण और प्रत्यक्ष समीक्षा का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाना है, ताकि जिले के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके और उनके सीखने के परिणामों एवं परीक्षा प्रदर्शन में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।







