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शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

हिंदी पखवाड़ा पर जमुई में आज सजेगा साहित्य का मंच, समग्र भारत न्यास करेगा सम्मानित

जमुई/बिहार। हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक विमर्श को समर्पित साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रकल्प ‘पगडंडी जमुई’ के तत्वावधान में हिन्दी पखवारा के अंतर्गत समग्र भारत न्यास, जमुई की ओर से दसवें संस्करण का दिनकर जयंती सह सम्मान समारोह शुक्रवार, 25 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। शहर के न्यू शगुन वाटिका में सुबह 10:30 बजे से होने वाले इस साहित्यिक आयोजन में साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा, संस्कृति, संगीत और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजकों में उत्साह है। आयोजन को हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पण के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभाओं और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। दिनकर जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम साहित्य और समाज के बीच संवाद स्थापित करने का भी माध्यम बनेगा।

समग्र भारत न्यास के संस्थापक डॉ. रविश कुमार सिंह ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि हिन्दी पखवारा के तहत प्रत्येक वर्ष साहित्य और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष भी दिनकर जयंती के अवसर पर सम्मान समारोह एवं साहित्यिक आयोजन किया जा रहा है।

समग्र भारत न्यास की मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी वीणा सिंह ने बताया कि दसवें संस्करण के लिए विभिन्न सम्मान श्रेणियों में चयनित व्यक्तित्वों को समारोह के दौरान सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हिन्दी साहित्य, भाषा, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हिन्दी सेवी सम्मान के लिए दो नाम चयनित
पं. जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी हिन्दी सेवी सम्मान के लिए वर्ष 2025 में हिन्दी साहित्य में मौलिक लेखन के क्षेत्र में योगदान के लिए शिवनंदन सलिल का चयन किया गया है। वहीं वर्ष 2026 के लिए नाटक लेखन, निर्देशन तथा मंचन के क्षेत्र में योगदान के लिए कपिलदेव मंडल को इस सम्मान के लिए चुना गया है।

आयोजकों के अनुसार, दोनों साहित्यकारों ने हिन्दी के रचनात्मक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। एक ओर जहां मौलिक साहित्य लेखन को सम्मानित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नाटक जैसी सृजनात्मक और मंचीय विधा में योगदान को भी सम्मान के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

भजन लेखन और शास्त्रीय गायन के लिए अर्जुनदास सरस्वती सम्मान
अर्जुनदास सरस्वती सम्मान के लिए भी दो व्यक्तित्वों का चयन किया गया है। वर्ष 2025 के लिए महंथ यमुना राम को भजन लेखन और गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। वहीं वर्ष 2026 के लिए कपिलदेव कृपाला का चयन भक्ति परक रचनाओं के लेखन एवं शास्त्रीय गायन के लिए किया गया है।

इस सम्मान के माध्यम से साहित्य और संगीत के उस स्वरूप को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें रचनात्मकता के साथ भारतीय भक्ति परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की भी अभिव्यक्ति होती है।

विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मिलेगा नेतृत्व प्रतिदर्श सम्मान
समारोह में नेतृत्व प्रतिदर्श सम्मान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा। साहित्यिक पत्रकारिता और संपादन कला के क्षेत्र में योगदान के लिए चंदन केशरी, जबकि ईमानदार, स्वस्थ और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए मनोज तिवारी का चयन किया गया है।

वहीं कुशल संवाद संप्रेषण के लिए अभिषेक कुमार सिन्हा, अंग्रेजी साहित्य में मौलिक लेखन के लिए कुमुद कुमार तथा समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए पंकज कुमार सिंह को सम्मानित किया जाएगा।

महिला जागरुकता और विकास के क्षेत्र में सामाजिक कार्यों के लिए बेबी कुमारी का चयन किया गया है। संस्कृति जागरण के क्षेत्र में योगदान के लिए राजीव पाण्डेय तथा संगीत शिक्षण, विरासत और संस्कृति संरक्षण के लिए देवेन्द्र प्रसाद सिंह को नेतृत्व प्रतिदर्श सम्मान प्रदान किया जाएगा।

इस सम्मान श्रेणी की खास बात यह है कि इसमें साहित्य और पत्रकारिता के साथ-साथ समाजसेवा, महिला जागरुकता, संस्कृति, संवाद और संगीत जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को शामिल किया गया है।
अंगिका साहित्य की सेवा के लिए साहित्य सेवा सम्मान
साहित्य सेवा सम्मान के लिए महेन्द्र प्रसाद ‘निशाकर’ का चयन किया गया है। उन्हें अंगिका साहित्य की सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। स्थानीय भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाले साहित्यकारों को मंच प्रदान करना इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पक्ष माना जा रहा है।

अंगिका जैसी क्षेत्रीय साहित्यिक परंपरा को सम्मानित किए जाने से स्थानीय भाषाई विरासत और लोक साहित्य को भी व्यापक पहचान देने का संदेश जाएगा। जमुई और आसपास के क्षेत्र की साहित्यिक-सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यह सम्मान विशेष महत्व रखता है।

साहित्य और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण आयोजन
हिन्दी पखवारा के तहत आयोजित यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से हिन्दी और भारतीय भाषाओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने का प्रयास भी होगा। आयोजकों का मानना है कि साहित्य समाज का आईना होने के साथ-साथ सामाजिक चेतना को दिशा देने का माध्यम भी है।

दिनकर जयंती के अवसर पर आयोजित होने के कारण कार्यक्रम का साहित्यिक महत्व और बढ़ जाता है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचनात्मक परंपरा हिन्दी साहित्य में ओज, राष्ट्रबोध, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों से जुड़ी रही है। ऐसे अवसर पर साहित्य और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय लोगों को सम्मानित करना युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है।

आयोजकों ने साहित्य प्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, सांस्कृतिक कर्मियों और शहरवासियों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। शुक्रवार को न्यू शगुन वाटिका में होने वाले इस आयोजन में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई लोगों के एकत्र होने की उम्मीद है। समारोह के माध्यम से जमुई में हिन्दी साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक नई ऊर्जा देने का प्रयास किया जाएगा।

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