जमुई/बिहार। बढ़ती महंगाई और लगातार बढ़ते पारिवारिक खर्च के बीच आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका एवं वित्तरहित शिक्षकों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में युवा ब्रिगेड जमुई के संस्थापक अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजय कुमार सिन्हा ने बिहार सरकार से आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका और वित्तरहित शिक्षकों की आर्थिक स्थिति पर गंभीरता से विचार करते हुए उनके मानदेय में पर्याप्त बढ़ोतरी करने की मांग की है।
संजय कुमार सिन्हा का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन से लेकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं से संबंधित विभिन्न जिम्मेदारियों के निर्वहन में सेविका एवं सहायिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की कई योजनाओं और पोषण एवं बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में भी वे लगातार काम करती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी जिम्मेदारियों और वर्तमान महंगाई के अनुपात में पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका को मिलने वाला मानदेय करीब 9 से 10 हजार रुपये के आसपास है। मौजूदा महंगाई में भोजन, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अन्य दैनिक जरूरतों के खर्च को देखते हुए इतनी राशि में परिवार का सुचारू रूप से भरण-पोषण करना बेहद कठिन है। ऐसे में सरकार को उनकी स्थिति का मानवीय दृष्टिकोण से आकलन करते हुए मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि करनी चाहिए।
25 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग
संजय कुमार सिन्हा ने बिहार सरकार से मांग की है कि आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं के मानदेय को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि सम्मानजनक मानदेय मिलने से न केवल इन कर्मियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वे और अधिक उत्साह एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगी।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका समाज के उस वर्ग के साथ प्रत्यक्ष रूप से काम करती हैं, जहां बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और महिलाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों को लेकर सरकार की योजनाएं संचालित होती हैं। इसलिए उनके योगदान को केवल मानदेय की राशि से नहीं, बल्कि उनके कार्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मान के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं पर भी सरकार करे विचार
संजय कुमार सिन्हा ने वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में इन शिक्षकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं पर भी सरकार को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और समाज कल्याण से जुड़े लोगों को आर्थिक असुरक्षा में रखकर बेहतर परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती। सरकार को संबंधित कर्मियों और शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं का अध्ययन कर उनके मानदेय एवं आर्थिक सहायता से जुड़ी व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना चाहिए।
27 सितंबर को जमुई में जुटने की अपील
इसी मुद्दे को लेकर युवा ब्रिगेड जमुई की ओर से जिले के आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, वित्तरहित शिक्षक तथा संबंधित लोगों से 27 सितंबर को जमुई पहुंचने का आह्वान किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम परिसर स्थित रावणेश्वर हॉल, जमुई में किए जाने की बात कही गई है।
संजय कुमार सिन्हा ने जिले के संबंधित लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपनी समस्याओं और मांगों को सामने रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से अपनी बात रखने से संबंधित समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
सरकार और प्रशासन तक समस्याएं पहुंचाने का दावा
युवा ब्रिगेड जमुई के संस्थापक अध्यक्ष ने कहा कि संगठन आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, वित्तरहित शिक्षक और अन्य मेहनतकश वर्गों की समस्याओं को सरकार एवं प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखने के लिए प्रयासरत है। उनका कहना है कि जिन लोगों की जिम्मेदारी समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है, उनकी आर्थिक परेशानियों का समाधान भी सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, वित्तरहित शिक्षक तथा जन वितरण प्रणाली से जुड़े डीलरों की विभिन्न समस्याओं को लेकर वे बिहार के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर इन मुद्दों को उनके समक्ष रखने तथा समाधान की दिशा में हरसंभव प्रयास करेंगे।
“समाज के लिए काम करने वालों को मिले आर्थिक सम्मान”
संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जो लोग लगातार समाज के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानजनक आर्थिक व्यवस्था मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से वर्तमान मानदेय व्यवस्था की समीक्षा करते हुए महंगाई, कार्यभार और जिम्मेदारियों के अनुरूप उचित वृद्धि करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका एवं वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं पर सकारात्मक पहल करती है तो इससे हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष राहत मिलेगी। साथ ही, इन वर्गों में सरकार के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।
युवा ब्रिगेड जमुई ने जिले के सभी आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, वित्तरहित शिक्षक एवं संबंधित लोगों से 27 सितंबर के कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज को मजबूती से उठाने की अपील की है।







