झाझा/जमुई। जमुई जिले के झाझा प्रखंड अंतर्गत सिमुलतला की होनहार बेटी एवं द पैलेस स्कूल की आठवीं कक्षा की छात्रा जूही कुमारी ने अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर की ओर एक और मजबूत कदम बढ़ाते हुए जिले और बिहार का गौरव बढ़ाया है। जूही ने 24 से 26 जुलाई तक राजस्थान के कोटपुतली (बहरोड़) स्थित आरपीएस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित सीबीएसई एथलेटिक्स क्लस्टर चैंपियनशिप की 1500 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ उन्होंने आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए भी अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया है।
जूही की इस सफलता से उनके परिवार, विद्यालय और पूरे जमुई जिले में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और शिक्षाविदों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं।
द पैलेस स्कूल की प्रधानाचार्या उर्वशी वर्मन ने जूही की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि जूही ने निरंतर कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को भी खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।
विद्यालय के एथलेटिक्स प्रशिक्षक करण सिंह एवं श्याम सिंह शेखावत ने भी जूही की उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि नियमित अभ्यास, बेहतर फिटनेस और प्रतियोगिता के दौरान अपनाई गई सटीक रणनीति ने उन्हें यह सफलता दिलाई। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी जूही उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय, जिले और राज्य का नाम रोशन करेंगी।
भारत के पूर्व ओलंपियन एवं अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित गौपाल सैनी ने भी जूही कुमारी को इस शानदार उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यदि जूही इसी समर्पण और मेहनत के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो भविष्य में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन कर सकती हैं।
विद्यालय के सूत्रों के अनुसार जूही ने इस प्रतियोगिता की तैयारी के लिए लंबे समय तक नियमित अभ्यास और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनका लक्ष्य आने वाले राष्ट्रीय मुकाबलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। जूही की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास से सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।







