जमुई/बिहार। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिले में बाल श्रम एवं बाल तस्करी के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता और सघन तलाशी अभियान चलाया गया। बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक संस्था ग्राम नेहरू युवा ट्रस्ट द्वारा जिले के विभिन्न बाजारों, दुकानों, होटलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विशेष जांच अभियान संचालित कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि कहीं भी बच्चों से अवैध रूप से मजदूरी न कराई जा रही हो। इस दौरान आम लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों, बच्चों के अधिकारों तथा बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों की जानकारी भी दी गई।
यह अभियान राज्य सरकार द्वारा जून माह को बाल श्रम उन्मूलन के लिए ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाए जाने संबंधी जारी निर्देशों एवं अधिसूचनाओं के तहत चलाया गया। सरकार द्वारा बाल श्रम और बाल तस्करी की शिकायत वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी, छापेमारी और संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों को शोषण और मजदूरी के चक्र से मुक्त कराया जा सके। इसी क्रम में ग्राम नेहरू युवा ट्रस्ट ने प्रशासनिक विभागों और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया।
अभियान के दौरान संस्था के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न दुकानों, प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर जाकर लोगों से संवाद किया तथा उन्हें यह समझाया कि बाल श्रम न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के बचपन, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। लोगों से अपील की गई कि वे किसी भी बच्चे को मजदूरी करते हुए देखें तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
ग्राम नेहरू युवा ट्रस्ट, देशभर में बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कार्य कर रहे 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क Just Rights for Children (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। यह नेटवर्क बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल विवाह और बच्चों के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है। संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि जून माह को विशेष रूप से बाल श्रम विरोधी कार्रवाई माह के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि बाल तस्करी और बाल मजदूरी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई समस्याएं हैं।
इस अवसर पर ग्राम नेहरू युवा ट्रस्ट के निदेशक सुनील कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, शिक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों और विकास के अवसरों से वंचित कर देता है। इसलिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए आगे आना होगा।
उन्होंने कहा, “बच्चों का स्थान स्कूलों में है, न कि ढाबों, होटलों, फैक्ट्रियों या अन्य श्रम स्थलों पर। बाल श्रम और बाल तस्करी एक-दूसरे से जुड़े हुए अपराध हैं। ऐसे में इनकी रोकथाम के लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। हम जिला प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर बच्चों को शोषण से मुक्त कराने, उनके पुनर्वास और उन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए लगातार कार्य करते रहेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि शोषण और मजदूरी से मुक्त कराए गए प्रत्येक बच्चे की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा की पुनर्स्थापना सुनिश्चित करना संस्था की प्राथमिकता है। साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क की सबसे बड़ी विशेषता उसका मजबूत सूचना-साझाकरण और निगरानी तंत्र है। देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत सहयोगी संगठन एक-दूसरे के साथ लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं और बाल तस्करी तथा बाल श्रम से जुड़े मामलों पर नजर रखते हैं। यही कारण है कि कई राज्यों में बच्चों की पहचान, खोज और उन्हें मुक्त कराने के अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए जा सके हैं।
संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच नेटवर्क के सहयोग से देशभर में 1.45 लाख से अधिक बच्चों को तस्करी और शोषण की स्थिति से मुक्त कराया गया। इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की थी, जिन्हें तस्करी के माध्यम से विभिन्न राज्यों में ले जाकर बाल श्रम करने के लिए मजबूर किया गया था। इन बच्चों को मुक्त कराने के बाद उनके पुनर्वास, शिक्षा और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में भी व्यापक कार्य किए गए।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित इस अभियान के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि बाल श्रम केवल कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवता और बच्चों के अधिकारों के विरुद्ध गंभीर अपराध है। अभियान में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं, सामुदायिक नेताओं और नागरिकों ने संकल्प लिया कि जिले को बाल श्रम और बाल तस्करी से मुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखे जाएंगे तथा प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी निभाई जाएगी।







