गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 1 मई 2026, शुक्रवार : गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत मौरा गांव में एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 वर्षीय बालक गगन कुमार की कथित रूप से चमकी बुखार (AES) से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने और स्वास्थ्य केंद्र बंद रहने के कारण बच्चे की जान चली गई।
बंद मिला हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
मृतक गगन कुमार, मौरा निवासी सरिता देवी और रमेश शर्मा का पुत्र था। परिजनों के अनुसार, जब बच्चे की तबीयत बिगड़ी तो उसे इलाज के लिए मौरा स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ले जाया गया, लेकिन वहां ताला लटका मिला। इस स्थिति ने परिजनों को वैकल्पिक व्यवस्था की ओर धकेल दिया।
झोलाछाप डॉक्टर से कराया इलाज, बिगड़ी हालत
स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने के बाद परिजन बच्चे को गांव के एक कथित झोलाछाप डॉक्टर मोहम्मद वसीम के पास ले गए। आरोप है कि डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन देने के तुरंत बाद ही गगन की हालत गंभीर हो गई और वह बेहोश हो गया।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी मौत
घबराए परिजन बच्चे को आनन-फानन में गिद्धौर स्थित दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
परिजनों का हंगामा, स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप
बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। स्थानीय ग्रामीण अनिल रावत ने कहा कि यदि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर समय पर खुला होता, तो संभवतः बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
डॉक्टर ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को मृत अवस्था में ही अस्पताल लाया गया था, इसलिए इलाज संभव नहीं हो सका।
जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने गिद्धौर थाना में आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नरोत्तम कुमार सिंह ने कहा कि मौरा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बंद क्यों था, इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस कर रही मामले की जांच
थाना प्रभारी राशि मालिक ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय पर इलाज और जिम्मेदार व्यवस्था ही ऐसी घटनाओं को रोक सकती है।






